मध्यप्रदेश:– सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी चल रही है. मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों को यूसीसी का अध्ययन करें. दिवाली से पहले मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश में जल्द ही सबके लिए एक नियम होंगे. मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी कर रही है. मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों तसे कहा कि यूसीसी का अध्ययन करें. यूसीसी को राज्य में लागू करना है. सीएम के संकेत के बाद यूसीसी की प्रक्रिया तेज हो गई है. गृह विभाग में प्रक्रिया तेज हो गई, यूसीसी बिल तैयार करने की जिम्मेदारी गृह विभाग की ही है. माना जा रहा है कि इसी साल दिवाली से पहले यूसीसी लागू करने की तैयारी है.
जल्द बन सकती है कमेटी
सूत्रों के अनुसार, यूसीसी को लेकर जल्द ही राज्य स्तर पर उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाएगी. मध्यप्रदेश में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने से पहले गोवा और उत्तराखंड में कुछ समय पहले लागू गिए यूसीसी को स्टडी किया जा रहा है. इन राज्यों में लागू किए गए यूसीसी को स्टडी कर मध्यप्रदेश के लिए संतुलित मॉडल तैयार किया जा सके. कमेटी बनने के बाद आगे कि प्रक्रिया और ड्राफ्ट को कैबिनेट में पेश करने की टाइमलाइन तय की जाएगी.
प्रदेश में हो सकते हैं ये बदलाव
मध्यप्रदेश में अगर यूसीसी को कैबिनेट से मंजूरी मिलती है और बिल को लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी होती है, तो सभी धर्मों के लिए शादी और तलाक के समान नियम लागू हो सकते हैं. एक से ज्यादा शादियां करने पर रोक लग सकती है. महिलाओं को समान अधिकार मिल सकते हैं. अन्य राज्यों में जहां यूसीसी लागू है वहां कुछ वर्गों को रियायतें दी गई हैं.
इन नियमों पर पड़ेगा असर
अगर मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू होता है तो सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक और विरासत और गोद लेने के नियम एक समान हो जाएंगे. शादी और तलाक को लेकर हर धर्म के नियम खत्म हो जाएंगे. सभी के लिए एक नियम लागू होगा. यूसीसी के बाद विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा. शादी के लिए न्यूनतम आयु समान होगी, तलाक के कानून भी सभी के लिए एक होगा. प्रदेश में बहुविवाह पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा. साथ ही पिता कि संपत्ति में बेटियों को भी बेटों के बराबर अधिकार मिलेगा.
क्या हैं प्रदेश में चुनौतियां
मध्यप्रदेश में यूसीसी को लेकर कई तरह की चुनौतियां है. मध्यप्रदेश में अलग-अलग प्रकार की सामाजिक व्यवस्थाएं हैं, इसमें आदिवासी समुदायों की परंपराएं भी हैं. बड़ी संख्या में जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजातियां हैं, जिनमें अलग-अलग विवाह पद्धतियां प्रचलित हैं. इन सामाजिक परंपराओं को यूसीसी में शामिल करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी. हालांकि, सरकार हर वर्ग को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहती है.
