नई दिल्ली:– इस बात की जानकारी दी है कि वह मध्य प्रदेश में एक नया प्लांट स्थापित करने के लिए लगभग 470 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है. यह प्लांट प्रति वर्ष 30 लाख टन कॉपर कंसंट्रेट का उत्पादन करने में सक्षम होगा.
जब मार्केट खुलेगा तो मेटल सेक्टर की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान कॉपर के स्टॉक पर निवेशकों की नज़र रहने वाली है. इसका कारण यह है कि मेटल कंपनी ने अपना एक बिजनेस अपडेट दिया है. हिंदुस्तान कॉपर ने बताया है कि वह मध्य प्रदेश में एक नया प्लांट स्थापित करने के लिए लगभग 470 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है. यह प्लांट प्रति वर्ष 30 लाख टन कॉपर कंसंट्रेट का उत्पादन करने में सक्षम होगा. सोमवार को स्टॉक में 8 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली थी और यह 453.50 रुपये के लेवल पर बंद हुआ था. बता दें कि स्टॉक अपने 52 वीक हाई लेवल से 40 प्रतिशत तक गिर चुका है.
Hindustan Copper बनाएगा प्लांट
एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, सरकार के स्वामित्व वाली हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड मध्य प्रदेश में एक नया प्लांट स्थापित करने के लिए लगभग 470 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है. यह प्लांट प्रति वर्ष 30 लाख टन कॉपर कंसंट्रेट का उत्पादन करने में सक्षम होगा. कंपनी भारत में तांबे के उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठा रही है.
किसको दिया गया कॉन्ट्रैक्ट?
कंपनी ने रेग्यूलेटरी फाइलिंग में कहा कि उसके बोर्ड ने अर्डी इंजीनियरिंग लिमिटेड को पूरा कॉन्ट्रैक्ट देने पर सहमति जताई है. यह ऑर्डर मध्य प्रदेश के मलंजखंड कॉपर प्रोजेक्ट में नए प्लांट के निर्माण के लिए है. यह कॉन्ट्रैक्ट टर्नकी कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर दिया गया है, मतलब इसमें अर्डी इंजीनियरिंग लिमिटेड ही डिजाइन, निर्माण और चालू करने जैसे फैज को संभालेगी.
कंपनी ने यह कदम क्यों उठाया?
कंपनी ने यह कदम ऐसे वक्त पर उठाया है जब हिंदुस्तान कॉपर भारत की सबसे बड़ी कॉपर माइन में से एक, मलंजखंड स्थित अपनी मुख्य माइन में उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इलेक्ट्रिक कारों, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी चीजों के लिए अधिक तांबे की ज़रूरत है.
कंपनी का क्वार्टर रिजल्ट
कंपनी ने दिसंबर तिमाही के दौरान अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 149 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की. कंपनी का प्रॉफिट इस तिमाही में 156 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले उसका मुनाफा 63 करोड़ रुपये था. साथ ही कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू भी 110 प्रतिशत बढ़कर 687 करोड़ रुपये हो गया, जो कि एक साल पहले 327 करोड़ रुपये था.
कंपनी का शेयरहोल्डिंग पैटर्न
कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न से पता चलता है कि दिसंबर 2025 तक, प्रमोटर्स के पास कंपनी की 66.1 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी. विदेशी निवेशकों के पास कंपनी की 6.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी, घरेलू निवेशकों के पास 5.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी और पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास कंपनी की 21.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी.
