नई दिल्ली:– वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना 9वां बजट पेश कर देश के आर्थिक भविष्य का खाका खींच दिया है। लगभग डेढ़ घंटे के भाषण में शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर रहा, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा रेलवे को लेकर हो रही है। इस बार रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर को कुल पूंजीगत व्यय का लगभग 47% हिस्सा आवंटित किया गया है, जो सरकार की प्राथमिकताओं को साफ दर्शाता है।
बजट के आंकड़ों में छिपा एक संकेत रेल यात्रियों की चिंता बढ़ा सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री किराए से 80000 करोड़ रुपये की कमाई की थी। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस लक्ष्य को बढ़ाकर 87,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। 7000 करोड़ रुपये की यह अनुमानित बढ़ोतरी इशारा करती है कि आने वाले दिनों में रेल टिकटों के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि, यह वृद्धि जनरल बोगी में होगी या एसी कोच में इसका अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड ही करेगा। राजस्व बढ़ाने का दूसरा तरीका यात्रियों की संख्या में वृद्धि भी हो सकता है, लेकिन किराए में आंशिक बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाई स्पीड भारत का नया रोडमैप
बजट की सबसे बड़ी हाईलाइट 7 नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा रही। सरकार का लक्ष्य बड़े महानगरों को औद्योगिक हब और सांस्कृतिक केंद्रों से जोड़ना है। इन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली, वाराणसी, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई और सिलीगुड़ी जैसे शहरों के बीच की दूरी समय के लिहाज से काफी कम हो जाएगी।
ये कॉरिडोर न केवल यात्रा को सुगम बनाएंगे, बल्कि आईटी हब और वित्तीय केंद्रों के बीच लॉजिस्टिक्स की लागत को भी कम करेंगे।
नेशनल रेल प्लान 2030 पर चल रहा काम
भारत में वर्तमान में नेशनल रेल प्लान 2030 पर काम चल रहा है, जिसका उद्देश्य भविष्य की मांगों को देखते हुए रेलवे का आधुनिकीकरण करना है। हाई स्पीड कॉरिडोर इसी विजन का हिस्सा हैं। इसके अलावा कवच सुरक्षा प्रणाली के विस्तार और वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर भी बजट में विशेष ध्यान दिया गया है ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बना रहे। बजट के इन प्रावधानों से साफ है कि सरकार भारतीय रेलवे को विश्व स्तरीय बनाने की दिशा में भारी निवेश कर रही है, जिसका बोझ भविष्य में यात्री किराए पर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।
