नई दिल्ली:– ट्रंप की की अपील के बावजूद जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के 17वें दिन दोनों देशों ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए वॉरशिप भेजने से साफ इनकार कर दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ गया है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz से होकर वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस इलाके में युद्ध का खतरा पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप की अपील पर जापान और ऑस्ट्रेलिया का इनकार:
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने सहयोगी देशों से होर्मुज स्ट्रेट में नौसेना तैनात कर समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने की अपील की थी। लेकिन जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने साफ कर दिया कि उनका देश इस संघर्ष में सैन्य रूप से शामिल होने का इरादा नहीं रखता। जापान अपनी करीब 90% कच्चे तेल की जरूरत इसी रास्ते से पूरी करता है। ऐसे में युद्ध में शामिल होने से उसकी ऊर्जा आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है। वहीं Australia ने भी सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाते हुए कहा कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधि बढ़ने से तेल और ईंधन सप्लाई पूरी तरह बाधित हो सकती है।
नाटो देशों को ट्रंप की चेतावनी:
इस फैसले के बाद North Atlantic Treaty Organization (NATO) के सहयोगियों पर दबाव बढ़ गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि जो देश इस समुद्री मार्ग का उपयोग करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सहयोगी देश मदद नहीं करते हैं तो नाटो गठबंधन का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
ईरान की ‘सेजिल’ मिसाइल से बढ़ी चिंता:
इस बीच ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने इजराइल के सैन्य ठिकानों पर ‘सेजिल’ बैलिस्टिक मिसाइल दागने का दावा किया है।विशेषज्ञों के अनुसार इस मिसाइल की मारक क्षमता 2000 से 2500 किलोमीटर तक है। इसकी रेंज में मध्य-पूर्व के साथ-साथ यूरोप और एशिया के कई हिस्से भी आते हैं, जिससे कई देशों में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
UAE में फेक न्यूज पर कार्रवाई, 19 भारतीय गिरफ्तार:
युद्ध के दौरान सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी को लेकर United Arab Emirates ने सख्त कदम उठाए हैं। यूएई के अटॉर्नी जनरल Hamad Saif Al Shamsi के आदेश पर सोशल मीडिया पर फेक वीडियो और अफवाह फैलाने के आरोप में 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 19 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। सरकार ने कहा है कि युद्ध के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली गलत जानकारी अशांति और डर का माहौल पैदा कर सकती है, इसलिए कड़ी निगरानी की जा रही है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्ग है। वैश्विक तेल व्यापार का करीब 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। मध्य-पूर्व से एशिया और यूरोप को ऊर्जा सप्लाई का प्रमुख रास्ता, युद्ध की स्थिति में वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल संभव है, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के बीच सहयोगी देशों का सैन्य समर्थन से पीछे हटना दिखाता है कि दुनिया की बड़ी ताकतें सीधे युद्ध में उतरने से बचना चाहती हैं। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
