मध्यप्रदेश:- भारत के ज्यादातर हिंदू परिवारों में हर दिन पूजा-पाठ जरूर होता है. पूजा-पाठ के बाद भगवान को भोग भी लगाया जाता है. कुछ लोग तो सुबह में बने भोजन को ही भगवान के सामने भोग के रूप मे चढ़ाने के बाद ही उसका सेवन करते हैं. वहीं, कुछ लोग प्रसाद के रूप में देवी-देवताओं को फल, मिठाइयां, पकवान, पंचामृत आदि का भोग लगाते हैं लेकिन भगवान को भोग लगाते समय कुछ बातों का आपको विशेष ध्यान रखना चाहिए.
बड़े-बड़े ग्रन्थों के साथ ही शास्त्रों में भी भोग लगाने के क्रिया-कलाप बताए गए हैं. अगर आप इसके अनुसार, भगवान को भोग लगाते हैं तो ऐसे में भगवान उसे ग्रहण करते हैं. साथ ही, आपकी पूजा का शुभ फल भी आपको प्रदान करते हैं. आइए जानते हैं भोग लगाने के उन नियमों को जिसे भारत के महान ज्योतिषाचार्यों और वेद पुराणों के द्वारा भी बताया जाता है.
भोग लगाने से पहले ये चार बातें जान लें
देवी-देवता को प्रसाद चढ़ाने और भोग लगाने के कुछ देर बाद उस सामाग्री उठाकर कहीं और साफ स्थान पर रख देना चाहिए.
भोग लगाने के बाद लोगों में भोग की सामाग्री निश्चित रूप से बांट देनी चाहिए.
पूजा के समय लगाए गए भोग को पूजा समाप्त होने के बाद मंदिर से हटा देना चाहिए.
मंदिर में पूजा के बाद भोग नहीं रखना चाहिए क्योंकि ज्यादा देर तक मंदिर में भोग रखने से भोग में नकारात्मकता आ जाती है.
किन चीजों का भोग लगाना चाहिए?
भगवान को पवित्रता बहुत प्रिय है इसलिए स्नान आदि करके शुद्ध होकर भगवान की पूजा आराधना करनी चाहिए. भगवान का भोग सात्विक होना चाहिए. भगवान के भोग में लहसुन, प्याज आदि का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. भोग बनाने के लिए तामसिक चीजों का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए. अगर आप ऐसा करते हैं, तो वह पूजा सफल नही हो पाती है.
प्रसाद में कैसे बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए?
भोग लगाते वक्त सदैव ध्यान रखें कि धातु से बने बर्तन का प्रयोग करें. अगर धातु के बर्तन नहीं हैं तो ऐसे में केले के पत्ते और पान के पत्ते पर भोग को रखकर लगा सकते हैं. कभी-भी भगवान के सामने सीधे तौर पर प्रसाद नहीं रखना चाहिए. ऐसे में हमेशा ध्यान रखें कि किसी न किसी पात्र में ही सामाग्री को रखकर ही भगवान का भोग लगाए.
