नई दिल्ली:- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में एक बड़े अभियान में सुरक्षा बलों ने टॉप सीपीआई-माओवादी नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू सहित 27 माओवादियों ढेर कर दिया. इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय सुरक्षाबलों के प्रयासों की सराहना की.
एक्स पर एक पोस्ट में, पीएम मोदी ने कहा, “इस उल्लेखनीय सफलता के लिए हमें सुरक्षाबलों पर गर्व है. हमारी सरकार माओवाद के खतरे को खत्म करने और हमारे लोगों के लिए शांतिपूर्ण और प्रगतिशील जीवन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.
इससे पहले दिन में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह एक बड़ी सफलता है और पुष्टि की कि सुरक्षा बलों ने सीपीआई-माओवादी के महासचिव बसवराजू सहित 27 खूंखार माओवादियों को मार गिराया है. एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के तीन दशकों में यह पहली बार है कि सुरक्षा बलों ने एक महासचिव स्तर के नेता को मार गिराया है.
अमित शाह ने कहा कि बसवराजू नक्सल आंदोलन का रीढ़ था. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़ में 54 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और 84 नक्सलियों ने सरेंडर किया है. अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार अगले साल 31 मार्च से पहले नक्सलवाद को खत्म करने के लिए संकल्पबद्ध है.
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साओ ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने के लिए सुरक्षा बल कड़ी मेहनत कर रहे हैं. अरुण साओ ने एएनआई से कहा कि, राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने के लिए कार्यक्रम चल रहा है. नारायणपुर में मुठभेड़ में दो दर्जन से ज्यादा नक्सली मारे गए हैं. उन्होंने कहा, “हमारे सुरक्षा बल पूरी लगन से काम कर रहे हैं ताकि मार्च 2026 तक बस्तर नक्सल मुक्त हो जाए.”
उन्होंने यह भी कहा कि, मुठभेड़ के दौरान एक जवान घायल हो गया. माओवादी आंदोलन की रीढ़ तोड़ने के लिए छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टालु हिल (केजीएच) के पास सुरक्षा बलों द्वारा ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ नाम का संयुक्त अभियान शुरू किया गया था.
बुधवार को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में एक ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने 27 खूंखार माओवादियों को ढेर कर दिया. मार जाने वाले खूंखार सीपीआई-माओवादी का महासचिव और टॉप नेता नक्सल आंदोलन की रीढ़ नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू भी शामिल है. मुठभेड़ नारायणपुर के अबूझमाड़ के वन क्षेत्र में हुई.