नई दिल्ली:– इंडक्शन चूल्हा ‘फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण’ के नियम पर काम करता है। इस वजह से वह किसी बर्तन को सीधी आंच नहीं पहुंचाता। उसके बेस को गर्म करता है। साथ ही हीट डिब्ट्रीब्यूशन और तवे की बनावट प्रमुख कारण हैं जिस वजह से इंडक्शन पर रोटी अच्छी नहीं बनती।
LPG सिलिंडर की समस्याओं के चलते देश में बड़ी संख्या में लोगों ने इंडक्शन खरीदे हैं और उन्हें इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इंडक्शन में दिनभर का प्रमुख और जरूरी खाना आराम से बन जाता है, लेकिन उसमें रोटियां नहीं बन पातीं। बहुत से लोग कोशिश करते हैं, लेकिन फूली-फूली रोटियां बनना नामुमकिन होता है। इंडक्शन पर रोटी नहीं बन पाने की प्रमुख वजह इसकी तकनीक है। सीधी आंच की कमी, हीट डिब्ट्रीब्यूशन और तवे की बनावट प्रमुख कारण हैं, जिन वजहों से इंडक्शन पर रोटियां नहीं बन पातीं। इसके साथ ही फैराडे का विद्युत चुंबकीय प्रेरण का नियम (Faraday’s Laws of Electromagnetic Induction) प्रमुख है, जिस पर इंडक्शन चलता है।
आईआईटी कानपुर की SATHEE वेबसाइट के अनुसार, फैराडे का विद्युत चुंबकीय प्रेरण का नियम, भौतिक विज्ञान यानी फिजिक्स का महत्वपूर्ण सिद्धांत है। फैराडे का पहला नियम बताता है कि बिजली कब पैदा होगी? अगर आप किसी तार की कुंडली (Coil) के पास किसी चुंबक को हिलाते हैं या चुंबक के पास तार को हिलाते हैं, तो उस तार में बिजली (Electromotive Force – EMF) पैदा हो जाती है। फैराडे का दूसरा नियम बताता है कि पैदा होने वाली बिजली की मात्रा कितनी होगी। मौजूदा समय में जनरेटर, ट्रांसफार्मर और इंडक्शन चूल्हा इसी सिद्धांत पर काम करते हैं। इंडक्शन चूल्हें में चुंबक के बजाय बिजली से ‘बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र’ बनाया जाता है, जो बर्तन में करंट पैदा करके उसे गर्म कर देता है।
फैराडे के बताए नियम से स्पष्ट हो जाता है कि इंडक्शन किसी बर्तन में करंट पैदा करके उसे गर्म करता है। इस वजह से बर्तन को सीधी आंच नहीं मिलती। वहीं, रोटी को फुलाने के लिए सीधी आंच की जरूरत होती है। इंडक्शन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है और उसमें आग नहीं निकलती। इस वजह से इंडक्शन में रोटी नहीं फूलती और रोटी बनाना असंभव सा होता है।
फैराडे के नियम से पता चलता है कि इंडक्शन, सीधे बर्तन के उस हिस्से को गर्म करता है जिससे वह जुड़ा होता है। यानी किसी बर्तन का बेस गर्म होता है। रोटी फुलाने के लिए हीट का डिस्ट्रीब्यूशन होना जरूरी है। हीट डिस्ट्रीब्यूशन होने से ही रोटी के चारों तरफ गर्म हवा बनेगी। इंडक्शन में तवा सिर्फ नीचे से गर्म होता है। उसमें रोटी डालने पर वह सिर्फ पक जाएगी या जल जाएगी, लेकिन बन नहीं पाएगी।
इंडक्शन बनाने वाली कंपनियां बताती हैं कि उनके प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने बर्तनों का बेस चपटा होना चाहिए। वहीं, भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले तवे का बेस थोड़ा मुड़ा हुआ होता है। आजकल इंडक्शन तवा भी आने लगे हैं। लेकिन उनमें भी रोटी के किनारों तक एकसमान आंच नहीं पहुंचती। इस वजह से इंडक्शन तवा पर परांठे तो बन जाते हैं लेकिन रोटी नहीं बन पाती।
इस तकनीकी समस्या का कोई पुख्ता उपाय नहीं है। हालांकि जुगाड़ु उपाय के रूप में इंडक्शन फ्रेंडली रोटी मेकर या इंडक्शन स्टील ग्रिल बेचे जा रहे हैं। लेकिन वह इन्फ्रारेड चूल्हें पर काम बेहतर करते हैं। उनमें रोटियां बन तो जाती हैं, लेकिन वो स्वाद और अंदाज नहीं आएगा, जो गैस चूल्हे पर आता है।
