नई दिल्ली :– यूपीआई से लेनदेन अब कैश के मुकाबले कई गुना बढ़ चुका है. साथ ही इसकी लागत पर आ रहे खर्च की वजह से सरकार पर बोझ भी बढ़ता जा रहा है. यही कारण है कि पिछले कई महीनों से यूपीआई सर्विस पर फीस वसूलने की बात की जा रही है. अब इस पर सरकार ने अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया है, जिसका सीधा असर देश के करोड़ों लोगों पर पड़ेगा. वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने सोमवार को कहा कि यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) से लेनदेन आगे भी मुफ्त रहेगा और सरकार ने इसके खर्च के बोझ को खुद वहन करने का फैसला किया है.
वित्त सचिव ने कहा कि यूपीआई को समर्थन देने के लिए वित्तवर्ष 2026-27 के बजट में वित्तमंत्री ने 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, ताकि इस पर आने वाले खर्च को सब्सिडी दी जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों की गड़बड़ी के कारण साइबर धोखाधड़ी 3 फीसदी से भी कम है और लोगों की सतर्कता से इस समस्या से निपटा जा सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तवर्ष 2026-27 के बजट में लोकप्रिय डिजिटल भुगतान ऐप यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के लिए 2,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी की घोषणा की है. यह 2025-26 में संशोधित अनुमान के अनुसार 2,196 करोड़ रुपये थी.
सतर्कता से दूर सकते हैं साइबर फ्रॉड
नागराजू ने कहा कि यूपीआई को समर्थन देने को लेकर 2026-27 के बजट में 2,000 करोड़ रुपये के प्रावधान का मतलब है कि इसके जरिये मुफ्त में लेन-देन जारी रहेगा. साइबर धोखाधड़ी के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैंकों की गड़बड़ी के कारण साइबर धोखाधड़ी 3 फीसदी से भी कम है और लोगों की सतर्कता से इस समस्या से निपटा जा सकता है. विकसित भारत के लिए बैंकों के लिए बजट में उच्च अधिकार प्राप्त समिति के गठन के प्रस्ताव के बारे में कहा कि अभी समिति के कामकाज के नियम और शर्तें तैयार की जाएंगी. उसके बाद समिति का गठन किया जाएगा.
मजबूत हो रहे भारतीय बैंक
उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद समिति के जरिये एक खाका तैयार करना है कि आखिर कैसे बैंकों को विकसित भारत के लिए तैयार किया जाएगा. अभी बैंकों में एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) कम है, लाभ अच्छा है. हम मजबूत और बेहतर बैंक की स्थिति में हैं. हमारे जैसे देश के लिए हमें तीन से चार बड़े बैंकों की जरूरत है. वित्त मंत्रालय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को मौजूदा 20 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने पर विचार कर रहा है, ताकि उनके पूंजी आधार को मजबूत किया जा सके.
अभी कितना है एफडीआई
नागराजू ने कहा कि सरकारी बैंकों के लिए एफडीआई सीमा को 49 फीसदी तक बढ़ाने के लिए मंत्रालयों के बीच परामर्श जारी है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में अभी एफडीआई की सीमा 20 फीसदी तो निजी क्षेत्र के बैंकों में 74 फीसदी है. निजी क्षेत्र के बैंकों में 49 फीसदी तक एफडीआई की स्वत: मंजूर मार्ग से अनुमति है. इससे अधिक और 74 फीसदी तक के लिए सरकार की अनुमति जरूरी होती है. बड़े बैंकों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को 3-4 बड़े बैंकों की जरूरत होगी और छोटे बैंकों को मर्ज करके इस लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है.
