नई दिल्ली:– RBI तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक आज से शुरू हुई, गवर्नर संजय मल्होत्रा 8 अप्रैल को नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आज सोमवार से शुरू हो गई है. वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और ‘यथास्थिति’ बनाए रखेगा.
महंगाई और कच्चे तेल का दबाव
इस बैठक का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं. मार्च के दौरान आए इस ऊर्जा संकट ने भारत के लिए ‘आयातित मुद्रास्फीति’ का खतरा बढ़ा दिया है. विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि आरबीआई ने दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25% की कटौती कर इसे 5.25% पर लाया था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अब और कटौती की गुंजाइश खत्म होती दिख रही है.
विशेषज्ञों की राय
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, “आरबीआई से फिलहाल किसी तत्काल नकदी प्रबंधन या मुद्रा हस्तक्षेप की उम्मीद नहीं है, क्योंकि बैंक जरूरत पड़ने पर पहले से ही कदम उठा रहा है.” वहीं, एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ जैसे उपकरणों का उपयोग कर सकता है ताकि सरकारी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित किया जा सके और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनी रहे.
एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने चेतावनी दी है कि रुपया कमजोर होकर प्रति डॉलर 95 के स्तर को छू रहा है, जिससे भारत इस संकट से अछूता नहीं है. यदि महंगाई दर आरबीआई के ऊपरी संतोषजनक स्तर (6 प्रतिशत) को पार करती है, तो भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
8 अप्रैल को गवर्नर संजय मल्होत्रा नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे. बाजार की नजर मुख्य रूप से दो चीजों पर होगी:
विकास दर (GDP) और महंगाई का संशोधित अनुमान: क्या कच्चे तेल की कीमतों को देखते हुए आरबीआई अपने अनुमानों में बदलाव करता है?
भविष्य का रुख (Forward Guidance): क्या केंद्रीय बैंक अपना ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार रखता है या महंगाई को देखते हुए सख्त रुख अपनाने का संकेत देता है?
फिलहाल, उद्योग जगत और आम आदमी के लिए राहत की बात यही है कि होम लोन और ऑटो लोन की ईएमआई (EMI) में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना कम है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता ने भविष्य की राह को चुनौतीपूर्ण बना दिया है.
