
New Delhi: अभी चारों तरफ महंगाई (Inflation) का शोर है. खाने-पीने से लेकर पहनने और घरों में इस्तेमाल होने वाले सभी जरूरी सामान महंगे हो गए हैं. हम महंगाई का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि आटा की कीमत (price of flour) 12 सालों के उच्चतम स्तर (highest level) पर पहुंच गई है. अप्रैल (April) महीने में आटे की कीमत 32.38 रुपए प्रति किलो रही जो जनवरी 2010 के बाद सर्वोच्च स्तर (highest level) है. अपने देश में गेहूं के प्रोडक्शन और स्टॉक (production and stock) दोनों में गिरावट आ रही है, साथ ही विदेशों (overseas) से इसकी मांग बढ़ी है जिसके कारण कीमत में उछाल आ रहा है. खाने का तेल पहले से आसमान छू रहा है. खाने-पीने के अन्य सामान भी तेजी से महंगे हो रहे हैं.
लगभग तीन महीने से महंगाई भी 6 फीसदी के पार रही है जो रिजर्व बैंक (reserve Bank) के अपर लिमिट (upper limit) से ज्यादा है. अप्रैल की महंगाई तो 7.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स (ministry of consumer affairs) की तरफ से शेयर की गई जानकारी के अनुसार, 7 मई को गेहूं के आटे की औसत कीमत 32.78 रुपए प्रति किलोग्राम रही. सालाना आधार पर इसमें 9.15 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. 7 मई 2021 को यह कीमत 30.03 रुपए रही थी.
यूक्रेन दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं सप्लायर
कीमत में उछाल को लेकर कहा जा रहा है कि यूक्रेन में जारी जंग के कारण ग्लोबल डिमांड बढ़ी है. इसके अलावा इसके प्रोडक्शन में भी गिरावट आई है. यूक्रेन (Ukraine) दुनिया में गेहूं का बड़ा सप्लायर (Supplier) रहा है और वह जंग से जूझ रहा है जिसके कारण सप्लाई (supply) घट गई है. दूसरी तरफ देश में इस साल गेहूं की पैदावार कम होती दिख रही है. ऐसे में डिमांड (demand) का दबाव बढ़ा है जिससे कीमत में उछाल आ रहा है. बता दें कि इस साल मार्च (March) में कम बारिश हुई जिसके कारण घरेलू पैदावार पर असर हआ है.