चुनावी महापर्व का सूरज एक बार फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश के क्षितिज पर चढ़ रहा है। लोकसभा की सीट नंबर-एक सहारनपुर का मुहूर्त निकल चुका है। रणक्षेत्र में मुद्दों और दावों की तपिश है। भगवा रथ के सबसे बड़े सारथी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मेरठ में 31 मार्च को पहली चुनावी जनसभा कर तरकश के बड़े तीर छोड़ चुके हैं।
चुनावी इंजन का बदलता गियर
चौधरी चरण सिंह विश्विवद्यालय के पत्रकारिता विभाग के प्रभारी प्रशांत कुमार कहते हैं ‘नरेन्द्र मोदी पश्चिम उप्र में संबोधन करते हैं तो हर किसान चौधरी साहब से स्वाभाविक जुड़ाव महसूस करता है। मेरठ का हर व्यक्ति क्रांति का भागीदार महसूस करता है। उनकी अगुआई में पश्चिम उत्तर प्रदेश ने फिर भाजपा के चुनावी इंजन में नया गियर लगा दिया है।’
पश्चिम यूपी से 19 और 26 अप्रैल को उठने वाली चुनावी बयार पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड तक के समीकरणों की दिशा तय करेगी। एडवोकेट केके चौबे कहते हैं कि ‘भाजपा पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण, बुलडोजर नीति और दर्जनों नए हाइवे की कनेक्टिविटी का एजेंडा लेकर चुनाव में उतरी है। 2014 से सब कुछ बदल गया। अब खेतीबाड़ी इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनता कि परिणाम पलट दे।’
