मध्यप्रदेश:– साल का सबसे पवित्र पर्व कार्तिक पूर्णिमा इस बार 5 नवंबर 2025, बुधवार को मनाया जाएगा. यह पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को आता है, जो इस साल 4 नवंबर की रात 11:03 बजे से शुरू होकर 5 नवंबर की रात 9:05 बजे तक रहेगी. इस दिन को हिंदू धर्म में देव दीपावली और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है.
पौराणिक मान्यता
इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध कर धर्म की रक्षा की थी. इस विजय की खुशी में देवताओं ने स्वर्ग से दीप जलाकर उत्सव मनाया था. तभी से यह तिथि दीपदान के पर्व के रूप में प्रसिद्ध हुई. कार्तिक पूर्णिमा का संबंध भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से भी है, इसलिए यह दिन दोहरी आस्था का प्रतीक माना गया है. यह दिन शिव-भक्तों और विष्णु-भक्तों दोनों के लिए समान रूप से शुभ है.
दीपदान का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन नदी या सरोवर के तट पर दीपदान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और आत्मा को उजाले का वरदान प्राप्त होता है. कहा जाता है कि यदि इस रात का एक दीप भी भगवान तक पहुंच जाए, तो वह व्यक्ति के जीवन से अंधकार मिटा देता है.
देव दीपावली का उत्सव
वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और पुरी जैसे तीर्थस्थलों में इस दिन दीपों की अविरल धाराएं प्रवाहित होती हैं. इसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान, दान और दीपदान तीनों ही शुभ कर्म माने गए हैं, क्योंकि यह दिन केवल रोशनी का नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का भी प्रतीक है।
