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    मध्य प्रदेश

    रीवा में बिगड़ती कानून व्यवस्था,अपराधी हुए बेलगाम,डिप्टी सीएम कब करेंगे समीक्षा..

    By Tv 36 HindustanFebruary 17, 2024No Comments8 Mins Read
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    रीवा में

    रीवा :- संभाग का मुख्यालय रीवा जिला और रीवा जिले में लगातार बढ़ती हत्या, लूट, अपहरण और मारपीट की घटनाओं ने कहीं ना कहीं संभागीय मुख्यालय की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है. हालत यह है की आम आदमी बेहद डरा हुआ है. आए दिन लूटपाट हत्या अपहरण और मारपीट जैसी घटनाएं बढ़ती ही जा रहीं हैं. समीक्षा बैठक के नाम पर खानापूर्ति और कार्रवाइयों के नाम पर वाहवाही लूटने का सिलसिला अनवरत जारी है. सबसे ज्यादा घेरे में वह जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं जो समय-समय पर विभाग की समीक्षा करते हैं लेकिन कानून व्यवस्था की समीक्षा नजर नहीं आती.

    स्वास्थ्य,कलेक्ट्रेट से संचालित विभाग, खनिज विकास के कार्य की समीक्षा चलती है और बैठकें होती लेकिन कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए क्या जिम्मेदारों के पास समय नहीं है. मध्य प्रदेश शासन में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का गृह जिला रीवा पिछले 10 वर्षों में जबरदस्त नशे की चपेट में और हर बार यह दावे किए जाते हैं कि नशे के खिलाफ करारा प्रहार जारी है अब यह प्रहार कैसे और कहाँ हो रहा है की नशे पर लगाम नहीं लग पा रही है और मामले बढ़ते जा रहे है पुलिस महकमे का कहना है की लगातार एक्शन हो रहा है लेकिन नशेगत अपराध के मामले इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि अब उन पर लगाम लगाना पुलिस प्रशासन के लिए और इस सरकार के लिए बेहद बड़ी चुनौती है.

    रीवा में हर विभाग की समीक्षा लेकिन कानून की समीक्षा क्यों कम
    रीवा में लगातार उपमुख्यमंत्री युद्ध स्तर पर समीक्षा बैठकें करते आए हैं. स्वास्थ्य,खनिज,ऊर्जा,लोक निर्माण विभाग, नगर निगम लगभग हर सेगमेंट में लगातार समीक्षा चलती है लेकिन रीवा जिले की कानून व्यवस्था को लेकर समीक्षा बहुत कम है या ना के बराबर हुई. इसके पीछे वजह क्या है अगर कानून व्यवस्था की समीक्षा भी समय-समय पर जिम्मेदार प्रतिनिधियों द्वारा की जाए तो अपराध की संख्या में कमी आएगी.

    नशीली दवाइयों के चपेट में युवा
    नशीली दवाइयों के सेवन के मामले साल दर साल रीवा और विंध्य में बढे हैं. हालत यह हैं की युवा पीढ़ी के ज्यादातर बच्चे नशे की चपेट में है जिसको लेकर सरकार का स्थानीय प्रशासन का कोई सख्त कोर्स ऑफ एक्शन आज तक नहीं दिखा.कुछ पुलिस कप्तान आये और समय-समय पर कुछ नवाचार और नई पहल शुरू हुई लेकिन जैसे ही पुलिस कप्तान का स्थानांतरण हुआ नए कप्तान फिर से नए तरीके से इस पर काम करना शुरू करते हैं पर पुख्त्ता परिणाम नहीं मिल पाए लेकिन सोचने का विषय यह है की प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में बेहताशा बढ़ते अपराध और उसके बाद भी कानून व्यवस्था की समीक्षा ठीक ढंग से क्यों नहीं हो पा रही है. अखबार के पन्ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों पर आप रीवा में बढ़ते हुए अपराधों की खबरें लगातार पढ़ पा रहे होंगे.

    सबसे ज्यादा अपराध नशे की हालत में

    युवाओं में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति कुछ ऐसी हो चुकी है कि नशे के दौरान सबसे ज्यादा अपराधी घटनाएं रीवा जिले में हो रही है. उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे होने के कारण दूसरे राज्यों से नशे की खेप मध्य प्रदेश पहुंच रही है और सबसे ज्यादा नशीली दवाइयां का सेवन विंध्य और रीवा में किया जा रहा है परिणाम यह है कि युवाओं की एक बड़ी पौध नशे की गिरफ्त में है और बर्बाद हो रही है. पिछले कुछ वर्षों में लूट,हत्या,मारपीट जैसे मामलों का रिव्यू किया जाए तो ज्यादातर मामले नशे से जुड़े हुए हैं. ऐसा लगता है जैसे कानून का कोई खौफ नहीं है और युवाओं की बड़ी फ़ौज अपराध की ओर बढ़ रही है. जिम्मेदार जनप्रतिनिधि बढ़ते अपराध और नशेगत अपराध के बारे में बोलने से कतराते हुए भी नजर आते हैं.ऐसे में आप ही सोचिये की शहर कैसे सुरक्षित होगा.

    पुलिस प्रशासन की तमाम कार्रवाइयों के बाद भी ना तो अपराध रुक रहे हैं और ना ही नशीली दवाइयां का अवैध कारोबार. यह बात ठीक है की पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है.उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे हुए पुलिस स्टेशन में सबसे ज्यादा नशीली दवाइयां के अवैध तस्करी का मामला सामने आया है लेकिन आज तक यह सरकार और यह व्यवस्था इन नशीली दवाइयां के कारोबार को रोक नहीं पाई है. तमाम दावे किए जाते हैं लेकिन हालात आपके सामने है और हालात इतने खराब है कि ऐसा लगता है कि इस पर लगाम लगा पाना अब बेहद मुश्किल है.

    बिगड़ती कानून व्यवस्था,अपराधी हुए बेलगाम,डिप्टी सीएम कब करेंगे समीक्षा..

    रीवा :- संभाग का मुख्यालय रीवा जिला और रीवा जिले में लगातार बढ़ती हत्या, लूट, अपहरण और मारपीट की घटनाओं ने कहीं ना कहीं संभागीय मुख्यालय की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है. हालत यह है की आम आदमी बेहद डरा हुआ है. आए दिन लूटपाट हत्या अपहरण और मारपीट जैसी घटनाएं बढ़ती ही जा रहीं हैं. समीक्षा बैठक के नाम पर खानापूर्ति और कार्रवाइयों के नाम पर वाहवाही लूटने का सिलसिला अनवरत जारी है. सबसे ज्यादा घेरे में वह जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं जो समय-समय पर विभाग की समीक्षा करते हैं लेकिन कानून व्यवस्था की समीक्षा नजर नहीं आती.

    स्वास्थ्य,कलेक्ट्रेट से संचालित विभाग, खनिज विकास के कार्य की समीक्षा चलती है और बैठकें होती लेकिन कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए क्या जिम्मेदारों के पास समय नहीं है. मध्य प्रदेश शासन में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का गृह जिला रीवा पिछले 10 वर्षों में जबरदस्त नशे की चपेट में और हर बार यह दावे किए जाते हैं कि नशे के खिलाफ करारा प्रहार जारी है अब यह प्रहार कैसे और कहाँ हो रहा है की नशे पर लगाम नहीं लग पा रही है और मामले बढ़ते जा रहे है पुलिस महकमे का कहना है की लगातार एक्शन हो रहा है लेकिन नशेगत अपराध के मामले इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि अब उन पर लगाम लगाना पुलिस प्रशासन के लिए और इस सरकार के लिए बेहद बड़ी चुनौती है.

    रीवा में हर विभाग की समीक्षा लेकिन कानून की समीक्षा क्यों कम
    रीवा में लगातार उपमुख्यमंत्री युद्ध स्तर पर समीक्षा बैठकें करते आए हैं. स्वास्थ्य,खनिज,ऊर्जा,लोक निर्माण विभाग, नगर निगम लगभग हर सेगमेंट में लगातार समीक्षा चलती है लेकिन रीवा जिले की कानून व्यवस्था को लेकर समीक्षा बहुत कम है या ना के बराबर हुई. इसके पीछे वजह क्या है अगर कानून व्यवस्था की समीक्षा भी समय-समय पर जिम्मेदार प्रतिनिधियों द्वारा की जाए तो अपराध की संख्या में कमी आएगी.

    नशीली दवाइयों के चपेट में युवा
    नशीली दवाइयों के सेवन के मामले साल दर साल रीवा और विंध्य में बढे हैं. हालत यह हैं की युवा पीढ़ी के ज्यादातर बच्चे नशे की चपेट में है जिसको लेकर सरकार का स्थानीय प्रशासन का कोई सख्त कोर्स ऑफ एक्शन आज तक नहीं दिखा.कुछ पुलिस कप्तान आये और समय-समय पर कुछ नवाचार और नई पहल शुरू हुई लेकिन जैसे ही पुलिस कप्तान का स्थानांतरण हुआ नए कप्तान फिर से नए तरीके से इस पर काम करना शुरू करते हैं पर पुख्त्ता परिणाम नहीं मिल पाए लेकिन सोचने का विषय यह है की प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में बेहताशा बढ़ते अपराध और उसके बाद भी कानून व्यवस्था की समीक्षा ठीक ढंग से क्यों नहीं हो पा रही है. अखबार के पन्ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों पर आप रीवा में बढ़ते हुए अपराधों की खबरें लगातार पढ़ पा रहे होंगे.

    सबसे ज्यादा अपराध नशे की हालत में

    युवाओं में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति कुछ ऐसी हो चुकी है कि नशे के दौरान सबसे ज्यादा अपराधी घटनाएं रीवा जिले में हो रही है. उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे होने के कारण दूसरे राज्यों से नशे की खेप मध्य प्रदेश पहुंच रही है और सबसे ज्यादा नशीली दवाइयां का सेवन विंध्य और रीवा में किया जा रहा है परिणाम यह है कि युवाओं की एक बड़ी पौध नशे की गिरफ्त में है और बर्बाद हो रही है. पिछले कुछ वर्षों में लूट,हत्या,मारपीट जैसे मामलों का रिव्यू किया जाए तो ज्यादातर मामले नशे से जुड़े हुए हैं. ऐसा लगता है जैसे कानून का कोई खौफ नहीं है और युवाओं की बड़ी फ़ौज अपराध की ओर बढ़ रही है. जिम्मेदार जनप्रतिनिधि बढ़ते अपराध और नशेगत अपराध के बारे में बोलने से कतराते हुए भी नजर आते हैं.ऐसे में आप ही सोचिये की शहर कैसे सुरक्षित होगा.

    पुलिस प्रशासन की तमाम कार्रवाइयों के बाद भी ना तो अपराध रुक रहे हैं और ना ही नशीली दवाइयां का अवैध कारोबार. यह बात ठीक है की पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है.उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे हुए पुलिस स्टेशन में सबसे ज्यादा नशीली दवाइयां के अवैध तस्करी का मामला सामने आया है लेकिन आज तक यह सरकार और यह व्यवस्था इन नशीली दवाइयां के कारोबार को रोक नहीं पाई है. तमाम दावे किए जाते हैं लेकिन हालात आपके सामने है और हालात इतने खराब है कि ऐसा लगता है कि इस पर लगाम लगा पाना अब बेहद मुश्किल है.

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