
छत्तीसगढ़ के धान के कटोरे को केन्द्र सरकार ने जबरदस्त झटका दिया है। केन्द्र के भारतीय खाद्य निगम द्वारा जारी निर्देश ने राज्य शासन के होश उड़ा दिए है। केन्द्र द्वारा इस बार वर्ष 2021-22 में उसना चावल लेने से हाथ खड़े किए जाने से प्रदेश के करीब 6 सौ उसना राइस मिलों में ताले लग जाएंगे। पहले ही कोरोना महामारी के चलते राइस मिलों का बंटाधार हो चुका है, वही उसना चावल नहीं लिए जाने की खबर के बाद प्रदेश राइस मिल एसोसिएशन ने केन्द्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मिली जानकारी अनुसार केन्द्र के भारतीय खाद्य निगम द्वारा जारी निर्देश में सिर्फ अरवा चावल लिए जाने का उल्लेख है। इस निर्देश ने प्रदेश के व्यापारिक जगत में आग लगा दी है। केन्द्र द्वारा अगर उसना राइस मिलों से चावल नहीं लेती हैं, तो जहां मिलों के संचालन का खर्च नहीं निकल पाएगा, वहीं प्रदेश के 6 सौ उसना राइस मिल में ताले लग जाएंगे। अफसरों ने बताया कि हर साल केन्द्र द्वारा छत्तीसगढ़ से 24 लाख टन उसना चावल लिया जाता है।
घाटे की नौबत
छत्तीसगढ़ राइस मिल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में 6 सौ राइस मिल उसना चावल बनाकर केन्द्र को देते है। कस्टम मिलिंग से मिलने वाली राशि से ही मिलों के रखरखाव तय किया जाता है। उन्होंने बताया कि हर साल उसना मिलों से निकलने वाले चावल की बड़ी खेप केन्द्र को जाती है। अब अगर इस बार केन्द्र उसना चावल नहीं खरीदेगी तो मिलों में ताले लग जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर आंदोलन भी शुरू कर दिया गया है।
मिलों की आर्थिक स्थिति खराब
प्रदेश के 6 सौ उसना राइस मिल में ताले लगने से हजारों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। मिलरों ने बताया कि एक मिल में पांच 100 से अधिक मजदूर काम करते है। ऐसे में अगर उसना मिल ही बंद हो जाएगा तो प्रदेश के 60 हजार मजूदर परिवार के सामने पलायन करने की स्थिति निर्मित हो सकती है। पहले ही कोरोना संक्रमण के चलते मिलों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है, वहीं अब केन्द्र के झटके से व्यापार उठने के बजाय ठप हो जाएगा।
केन्द्र द्वारा कस्टम मिलिंग से पहले एफसीआई के गोदाम और राइस मिलों की दूरी का सर्वे करने के निर्देश दिए है। जिसके आधार पर केन्द्र सरकार द्वारा परिवहन दर निर्धारित की जाएगी। माना जा रहा हैं कि परिवहन में गड़बड़ी के चलते केन्द्र द्वारा इस बार आनलाइन टैगिंग करा रही है। सर्वे में दूरी तय होने के अनुसार ही मिलरों को परिवहन का भाड़ा दिया जाएगा। इसके लिए केन्द्र ने राज्य से रिपोर्ट भी मांगे है।
मोर्चा खोल चुके
प्रदेश के राईस मिल रायपुर में आंदोलन शुरू कर चुके है। कोरोना के कारण पहले ही मिलरों की स्थिति खराब है। अब अगर उसना चावल नही लिया गया तो 6 सौ मिल में ताले लग जाएंगे।