नई दिल्ली:- मोबाइल नेक बैंड और के बढ़ते इस्तेमाल ने एक नई समस्या को जन्म दिया है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश वर्मा का कहना है कि इन उपकरणों का अधिक प्रयोग युवाओं की सुनने की क्षमता को कम कर रहा है और कई मामलों में बहरेपन का खतरा भी बढ़ रहा है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि आजकल के युवा, जो कि ज्यादातर समय मोबाइल नेक बैंड और ईयर बड्स में बिताते हैं, वे सुनने की क्षमता में कमी का अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये उपकरण केवल सुनने की क्षमता को ही नहीं, बल्कि कानों में दर्द और संक्रमण की समस्याओं को भी जन्म दे रहे हैं।
130 डेसिबल से अधिक ध्वनि: कान के लिए खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ध्वनि का स्तर 130 डेसिबल से अधिक हो जाता है, तो यह कान में तेज दर्द और सुनने की स्थायी हानि का कारण बन सकता है। ज्यादा बेस वाले इयरफोन कान के पर्दे पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं, जिससे कान के ऊतकों को नुकसान पहुंचता है।
सुरक्षित उपयोग के लिए सुझाव
डॉ. वर्मा ने सलाह दी कि कानों की देखभाल के लिए इयरफोन और Earbuds का उपयोग कम से कम करें। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं:
ध्वनि स्तर नियंत्रित करें: सुनने के दौरान ध्वनि के स्तर को कम रखें और जरूरत से ज्यादा वॉल्यूम बढ़ाने से बचें।
सफाई का ध्यान रखें: Earbuds और इयरफोन की नियमित रूप से सफाई करें और किसी अन्य के साथ इन्हें साझा न करें, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो सके।
वैकल्पिक विकल्पों का प्रयोग करें: हेडफोन और स्पीकर का उपयोग करें, जो कानों के लिए कम हानिकारक होते हैं।
जागरूकता का प्रसार
समाज में इस समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। युवाओं को इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है, ताकि वे इन उपकरणों के सुरक्षित उपयोग को समझ सकें और अपने कानों की सुरक्षा कर सकें।
ईएनटी विशेषज्ञों का यह कहना है कि नेक बैंड और इयरबड्स का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है बहरेपन को आमंत्रित बैंड और इयरबड्स का अत्यधिक उपयोग सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि लोग अपने कानों की सुरक्षा का ध्यान रखें और इन उपकरणों का सीमित और सुरक्षित उपयोग करें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की सुनने की समस्याओं से बचा जा सके।
