कोरबा:- छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत वयोवृद्ध देखभाल कार्यक्रम के तहत बुजुर्ग मरीजों की जांच की जा रही है. जिले के अलग अलग विकासखंडों के अधीन ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों की जांच की गई है. बुजुर्गों के स्वास्थ्य का क्या हाल है. यह पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर बुजुर्गों के स्क्रीनिंग की है. यह जांच अलग-अलग तिथि पर अलग-अलग स्थानों पर हुई है.
कोरबा के किन इलाकों में हुई जांच ?: अभी तक कोरबा, कटघोरा, करतला, पाली और पोड़ी उपरोड़ा में 55 हजार ग्रामीणों की स्क्रीनिंग की गई है. जिसमें बीपी, शुगर, हर्निया और इस तरह की अनेक बीमारियों की जांच की गई है. इनमें लगभग 10 फ़ीसदी मरीज मोतियाबिंद या आंखों परेशानी वाले प्रारंभिक लक्षण से ग्रसित मिले हैं.
यह जांच सीएचओ द्वारा किए गए: हालांकि यह जांच रूलर हेल्थ ऑफिसर और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की ओर से की गई है, विभिन्न गांवों में मोतियाबिंद से ग्रसित मरीजों के नाम, पता और संपर्क नंबर को विभाग की ओर से एकत्र किया गया है. आने वाले दिनों में इन मरीजों को संबंधित गांवों से निकालकर मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में लाया जाएगा. यहां पर मोतियाबिंद की जांच विशेषज्ञ डॉक्टरों से कराई जाएगी.
स्वास्थ्य विभाग ने दी जानकारी: मोतियाबिंद के इन मरीजों का ऑपरेशन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कराया जाएगा. इसके साथ ही मरीजों को मुफ्त में दवाइयां उपलब्ध कराई जाएगी.इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई है. ग्रामीण क्षेत्र के पीएचसी में केवल एक नेत्र सहायक का पद होता है, इसलिए ग्रामीणों को हायर सेंटर लाकर और भी बेहतर इलाज की सुविधा दिए जाने की बात विभाग ने कही है.
एक साथ ऑपरेशन करना भी चुनौती: कोरबा जिले के अलग-अलग विकासखंडों में रहने वाले 60 साल से अधिक आयु के लोगों के स्वास्थ्य की जांच जारी है. यह जांच पूर्व निर्धारित समय पर अलग-अलग क्षेत्रों में की जा रही है. जांच के दौरान जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वह चौंकाने वाले हैं.
केवल 30 से 40 फीसदी जांच पूरा: स्वास्थ्य विभाग की ओर से अलग-अलग विकासखंडों में बुजुर्गों की कुल आबादी का लगभग 30 से 40 फीसदी जांच पूरा हो पाया है. इस जांच में विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या निकलकर सामने आ रही है. इसे देखकर स्वास्थ्य विभाग भी हैरान है. यह जांच प्रारंभिक तौर पर की गई है और अभी विशेषज्ञ डॉक्टरों की ओर से मरीजों की जांच की जानी है.
बुजुर्गों की सेहत पर फोकस: भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शिविर में सामान्य तौर पर उन सभी बीमारियों की जांच की जा रही है, जो प्राय: 60 साल से अधिक आयु के लोगों में पाई जाती है. इन्हीं में से एक है आंखों की जांच. वयोवृद्ध स्वास्थ्य शिविर में मोतियाबिंद से प्रभावित मरीजों को जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाकर उनका ऑपरेशन करना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती है.
कोरबा के सीएमएचओ डॉक्टर एसएन केसरी ने बताया कि राष्ट्रीय वयोवृद्ध देखभाल कार्यक्रम के तहत बुजुर्गों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की जा रही है. गांव-गांव में शिविर लगाए जा रहे हैं, लगभग 55000 ग्रामीणों की जांच की जा चुकी है. जिसमें मोतियाबिंद के मरीज अधिक मिले हैं. हालांकि बुजुर्गों की हर तरह की जांच की जा रही है. जिसमें बीपी, शुगर, हर्निया, हाइड्रोसील हर तरह की बीमारी का भी पता लगाया जा रहा है.
जहां तक बात मोतियाबिंद के इलाज की है तो इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करेंगे. पहले तो गांव से लाकर इनकी जांच नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराई जाएगी. इसके बाद यदि ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है तो, हम डीएमएफ या अन्य मद से इनका इलाज करेंगे.- डॉ एसएन केसरी, सीएमएचओ, कोरबा
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ग्रामीणों के ऑपरेशन तय समय पर किए जाएंगे. इसके लिए नेत्र सहायकों की सेवाएं ली जाएंगी. इसके लिए किस ब्लॉक के मरीज का ऑपरेशन हफ्ते में किस दिन होगा यह पहले से ही तय किया गया है.