नई दिल्ली:- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को जगदलपुर के ऐतिहासिक सिरहासार भवन में आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने मांझी-चालकियों और जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी बातें सुनीं। राष्ट्रपति ने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए इन्हें संरक्षित रखने का आह्वान किया।
मेरे दादा, पिता और भाई भी मांझी थे
मुरिया दरबार को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “मैं भी मांझी की बेटी हूं। इस संस्कृति से मेरा गहरा नाता है। मेरे दादा, पिता और भाई मांझी थे। इसलिए मैं इस सामाजिक व्यवस्था और परंपरा को अच्छी तरह समझती हूं।”
उन्होंने कहा कि समय के साथ शासन व्यवस्था और कानून बदलते रहे हैं। प्राचीन काल में राजाओं का शासन था, फिर ब्रिटिश शासन आया और आज देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है। इसके बावजूद आदिवासी समाज ने अपनी गौरवशाली परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को जीवित रखा है। बस्तर की इस सांस्कृतिक विरासत को सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी है।
आपसी सहमति से सुलझाएं सामाजिक विवाद
राष्ट्रपति ने मुरिया दरबार की परंपरा को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की सबसे बड़ी विशेषता आपसी भाईचारा और मिल-जुलकर समस्याओं का समाधान निकालना है। गांवों में मांझी और परगना व्यवस्था के माध्यम से बैठक कर सामाजिक मामलों को सुलझाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि आज छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर भी लोग थाना और कोर्ट-कचहरी पहुंच जाते हैं। कानूनी प्रक्रिया में काफी समय और पैसा खर्च होता है। ऐसे में समाज से जुड़े मामलों को आपसी बातचीत, संवाद और सहमति के माध्यम से सुलझाने की परंपरा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि मुरिया दरबार एक महत्वपूर्ण सामाजिक व्यवस्था है। इसे लगातार बनाए रखना जरूरी है, ताकि समाज की पहचान, सांस्कृतिक धरोहर और आपसी सद्भाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।
एकजुटता और सामूहिक प्रयास का दिया संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनजातीय समाज से एकजुट होकर समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने सामूहिक प्रयासों का महत्व बताते हुए कहा कि मिल-जुलकर काम करने से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की मूल परंपरा सुख, शांति और आपसी भाईचारे के साथ रहने की रही है। गांव की भलाई के लिए लोग मिलकर पूजा-पाठ करते हैं और त्योहारों व खुशियों को भी सामूहिक रूप से मनाते हैं। इस परंपरा को आगे बढ़ाना जरूरी है।
बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ने और जीवन में आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए नई पीढ़ी को शिक्षा से जोड़ना बेहद जरूरी है।
उन्होंने जनजातीय प्रतिनिधियों से मुरिया दरबार की ऐतिहासिक परंपरा को निरंतर जारी रखने और इसे कभी बंद नहीं होने देने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार आदिवासी समाज के साथ खड़ी है।
