छत्तीसगढ़:– राज्योत्सव के अंतिम दिन बुधवार सुबह 10.30 बजे नवा रायपुर में भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एयरोबेटिक टीम ने अपने शौर्य का शानदार प्रदर्शन किया। सेना के पराक्रम के सामने रायपुर का उत्साह भी आसमान पर था। ऐसा इसलिए क्योंकि अनुमान से अधिक भीड़ एयर-शो देखने पहुंची।
प्रशासन का कहना है कि करीब 4 लाख से ज्यादा लोग एयर शो देखने पहुंचे थे। भीड़ इतनी हो गई कि शो समाप्त होने तक लोग लगातार कार्यक्रम स्थल आते रहे। लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा वाहनों की आवाजाही हुई। यही कारण है कि जिसे जहां से मौका मिला, सेना का शौर्य देखने रूक गया।
एयर-शो के दौरान सेना के जवानों ने आसमान में रोमांचक करतब दिखाए। सेंध तालाब के ऊपर हॉक एमके-132 फाइटर जेट्स के नौ विमानों ने एक साथ उड़ान भरते हुए तिरंगा, हार्ट इन द स्काई और एरोहेड जैसे फॉर्मेशन पेश किए। वहीं भारतीय वायुसेना की स्काई डाइविंग टीम के पैराट्रूपर्स ने विमान से छलांग लगाकर हवा में कलाबाजी दिखाई।
पैराट्रूपर्स की टीम ने फ्री फॉल, फॉर्मेशन जम्प, झंडे और स्मोक ट्रेल के साथ नीचे उतरते हैं। इस दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, राज्यपाल रेमन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित मंत्री, विधायक और सांसद मौजूद थे।
जानिए… एयर शो में शामिल टीम के बारे में आकाश गंगा यह भारतीय वायुसेना की स्काई डाइविंग टीम है, जो पैराट्रूपर्स से बनी है। यह टीम विमान से छलांग लगाकर हवा में करतब दिखाती है और युद्ध के समय किसी भी क्षेत्र में उतरने की क्षमता रखती है। ये फ्री फॉल, फॉर्मेशन जम्प, झंडे और स्मोक ट्रेल के साथ नीचे उतरते हैं।
गरुड़ कमांडो भारतीय वायुसेना की यह स्पेशल फोर्स यूनिट है, जो हर परिस्थिति में तेजी, सटीकता और गुप्त तरीके से ऑपरेशन करने के लिए जानी जाती है। इसमें पैराट्रूपिंग, स्नाइपिंग, आतंकवाद-रोधी, बंधक मुक्ति और दुश्मन क्षेत्र में मिशन जैसे कार्यों की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
सूर्यकिरण : यह हॉक एयरक्राफ्ट है, जिस पर फाइटर पायलटों को ट्रेनिंग दी जाती है। हॉक विमान अधिक स्थिर और फ्लाइंग के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
भीड़ का सही अनुमान ही नहीं लगा पाए 19 किमी तक 6 घंटे लगा रहा जाम
नवा रायपुर सेंध जलाशय के आसपास ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा गया। राज्योत्सव के समापन समारोह के दौरान आयोजित एयर शो देखने के लिए लोग ऐसे उमड़े कि जिसे जहां जगह मिली, वहीं गाड़ी खड़ी करके शो देखने लगे। जितने लोग कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे, उनसे आधे लोग कार्यक्रम स्थल ही नहीं पहुंच पाए।
उनकी गाड़ियां सड़क पर ठहर गई थी। लोग न आगे हो पा रहे थे और न ही पीछे जा रहे थे। कार्यक्रम शुरू होने के एक घंटे पहले से ही जाम लगना शुरू हो गया और कार्यक्रम खत्म होने के 4 घंटे तक लोग जाम में फंसे रहे। तेलीबांधा से लेकर सेंध जलाशय तक 19 किलोमीटर तक 6 घंटे जाम लगा रहा है।
भीड़ का आलम ऐसा था कि लोग पैदल भी नहीं निकल पा रहे थे। इस पूरे मामले में ट्रैफिक मैनेजमेंट पूरी तरह चरमरा गया। जहां गाड़ियां ले जाने की परमिशन ही नहीं थी, वहां लोगों ने अपने चार पहिया और दो पहिया वाहन पार्क कर दिए। यही जाम की मुख्य वजह बनी।
भास्कर एक्सपर्ट – सतीश कुमार, रिटायर्ड एयरफोर्स अधिकारी
एक से दूसरे फॉर्मेशन में जाने में लगता है 6 सेकेंड
एक फॉर्मेशन से दूसरे में जाने के लिए 6 सेकेंड का समय लगता है। इसमें हार्ट इन द स्काई, डायमंड, डीएनए जैसे कई तरह के फॉर्मेशन होते हैं। हर बार कुछ नया करने का प्रयास किया जाता है। हर शो से पहले ही मौके पर जाकर उसका गणित समझते हैं। देखा जाता है कि जो फॉर्मेशन हम प्लान कर रहे हैं वो कितना सुरक्षित है या कठिन है। फिर इसे आसमान में करके देखते हैं।
इसे फॉर्मेशन लीडर तय करते हैं। फ्लाइंग के दौरान सभी एक-दूसरे से लगातार संपर्क में रहते हैं और बातचीत करते हैं। इसमें दिशा-निर्देश दिया जाता है। इसके लिए 6 माह की तैयारी होती है। इसका रिहर्सल किया जाता है। उसके 6 माह बाद इसे आसमान पर दिखाया जाता है।
पूरा शो करने के लिए 120 लोगों की टीम लगती है। 9 फ्लाइट उड़ाते हैं। दो सुरक्षा देखते हैं। कम्युनिकेशन, सुरक्षा, ऑब्जरवेशन, इंजीनियरिंग देखते हैं। सभी लोग एयरपोर्ट से सिस्टम को कंट्रोल करते हैं। हर शो को बेहतर करने की कोशिश करते हैं।
