नई दिल्ली:– शनिवार को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर एक बड़े हमले की खबर सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इस खबर के तुरंत बाद शिया समुदाय के लोग दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन करने लगे। भारत में भी यह घटना चर्चा का विषय बनी, और कश्मीर से लेकर लखनऊ तक रहने वाले शिया मुसलमान सड़कों पर उतर आए। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी नाराजगी प्रकट की।
लखनऊ में शिया समुदाय में धार्मिक नेता की अचानक मृत्यु की खबर के बाद गहरा शोक देखने को मिल रहा है। समुदाय के लोगों ने शहर में तीन दिनों के शोक का ऐलान किया है और प्रमुख धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने समुदाय के सदस्यों से आग्रह किया है कि वे इन तीन दिनों के दौरान अपने-अपने स्तर पर शोक मनाएं तथा एकजुटता प्रदर्शित करें।
काले झंडे लगाने की अपील
मौलाना कल्बे जवाद ने अपील की है कि अली खामेनेई की मौत के दुख में सभी घरों, इमामबाड़ों और अन्य धार्मिक स्थलों पर काले झंडे लगाए जाएं, जो शोक का प्रतीक माने जा रहे हैं। साथ ही शहर के दुकानदारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी दुकानें बंद रखें, ताकि पूरे शहर में एक समान रूप से शोक का माहौल उत्पन्न हो सके।
विशेष शोकसभा का आयोजन
घटनास्थल पर लोगों में भारी संवेदना देखी जा रही है और समुदाय के लोग शोकसभाओं में शामिल होने के लिए तैयार हैं। इसी क्रम में आज रात 8 बजे शहर के ऐतिहासिक छोटा इमामबाड़ा में एक विशेष शोकसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
शोकसभा के समापन के बाद कैंडल मार्च का आयोजन भी किया जाएगा, जहाँ सहभागी मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम सिर्फ़ शोक प्रकट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एकता, शांति और इंसानियत के संदेश को फैलाने का भी प्रयास है।
पूरे देश में शोकसभाएं आयोजित
इसके अलावा, पूरे देश में समान रूप से शोकसभाएं आयोजित करने की अपील की गई है ताकि अलग-अलग शहरों में रहने वाले लोग भी इस दुख की घड़ी में सामूहिक श्रद्धांजलि दे सकें। आयोजकों ने विशेष रूप से कहा है कि यह मात्र एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का मुद्दा है, और सभी इंसानियत प्रेमियों से इसका हिस्सा बनने का अनुरोध किया गया है। लखनऊ में अब शहर के प्रमुख इमामबाड़ों, घरों और मोहल्लों में शोक का वातावरण है, और लोग आगे होने वाली सभाओं में भाग लेने की तैयारी में हैं।
