नई दिल्ली:– IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने ईरान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच परमाणु सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है। ईरानी परमाणु नियामक अधिकारियों से संपर्क स्थापित करने की उनकी लगातार कोशिशों के बावजूद अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इस बीच, क्षेत्र में बढ़ते टकराव और रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार परमाणु ठिकानों पर इजरायली हमले को लेकर उभरी चिंताओं ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। ग्रॉसी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक संवाद बहाल करने की अपील की है, ताकि परमाणु निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बाधित न हो।
IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ईरान के परमाणु नियामक अधिकारियों से संपर्क स्थापित करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, ईरान में जारी सैन्य तनाव के कारण अब तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। ग्रॉसी ने ईरान और अन्य संबंधित पक्षों से सभी सैन्य अभियानों में अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए संवाद की बहाली बेहद जरूरी है, ताकि परमाणु सुरक्षा और निरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर निगरानी जारी रखी जा सके।
परमाणु नियामक से संपर्क की कोशिश
राफेल ग्रॉसी के अनुसार, ईरानी परमाणु नियामक तंत्र के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह संवाद न सिर्फ मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए जरूरी है, बल्कि किसी भी संभावित परमाणु जोखिम को समय रहते समझने और नियंत्रित करने के लिए भी अहम है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह संचार माध्यम जल्द ही फिर से स्थापित हो सकेगा। अगर अमेरिका-इजराइल ने परमाणु सुविधाओं पर हमला किया है तो ईरान के कई शहरों में रेडिएशन का खतरा हो सकता है।
संयम की अपील और कूटनीति पर जोर
ग्रॉसी ने सभी पक्षों से सैन्य गतिविधियों में अत्यधिक सावधानी और संयम बरतने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमले की खबरों के बाद तनाव और बढ़ गया है। ऐसे में ग्रॉसी ने दोहराया है कि संघर्ष को और विस्तार से रोकने के लिए कूटनीति और बातचीत ही एकमात्र व्यवहारिक रास्ता है।
