ओडिशा :– शनिवार देर रात भाजपा शासित सरकार ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण नीति में बड़े बदलाव की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मेडिकल, इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा देने वाले कॉलेजों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) के लिए आरक्षण की सीमा लगभग दोगुना कर दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम इन समुदायों की आबादी के अनुपात में उनके अधिकार सुनिश्चित करने और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए उठाया गया है। खासतौर पर पिछड़ा वर्ग (SEBC) के छात्रों के लिए पहली बार तकनीकी शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
अब कितना मिलेगा आरक्षण?
अनुसूचित जनजाति (ST): 12% → 22.5%
अनुसूचित जाति (SC): 8% → 16.25%
पिछड़ा वर्ग (SEBC): पहली बार 11.25% सीटें आरक्षित
Odisha सरकार ने कुल आरक्षित सीटों को 50% की सीमा के भीतर रखा है ताकि कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके।
मेडिकल और इंजीनियरिंग में सीटों पर प्रभाव
मेडिकल (2,421 सीटें)
ST: 290 → 545
SC: 193 → 393
SEBC: 272 सीटें
इंजीनियरिंग (44,579 सीटें)
ST: 5,349 → 10,030
SC: 3,566 → 7,244
SEBC: 5,015 सीटें
नयी नीति राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, संबद्ध कॉलेजों, सरकारी संस्थानों (ITIs) और पॉलिटेक्निक पर लागू होगी। इसके दायरे में मेडिसिन, सर्जरी, डेंटल, नर्सिंग, फार्मेसी, मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशन, आर्किटेक्चर, पशु चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी और कृषि विज्ञान के कोर्स शामिल हैं।
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इस फैसले के राजनीतिक मायने
ओडिशा(Odisha) के मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने SC और ST छात्रों को उनकी आबादी के अनुपात में पर्याप्त सीटें नहीं दीं। भाजपा सरकार ने इसे सुधारने का कदम उठाया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, SEBC को पहली बार आरक्षण देने का निर्णय भाजपा के लिए राज्य में नए वोट बैंक की ओर इशारा है, जबकि SC और ST कोटे में वृद्धि पार्टी की स्थिति मजबूत करने का प्रयास है। बीजू जनता दल (BJD), जो दशकों तक राज्य की सत्ता में रही, पिछड़ों के लिए इस तरह के बड़े कदम नहीं उठा पाई थी, जिसका फायदा अब भाजपा उठाना चाहती है।
