नई दिल्ली:– लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और सदन की सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने वाले संविधान संशोधन विधेयकों के गिरने के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इन महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित न हो पाने के तत्काल बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने विपक्ष को घेरने के लिए अपनी धार तेज कर दी है।
जेपी नड्डा के घर हुई राजग की अहम बैठक
विधेयकों को बहुमत न मिलने के ठीक बाद भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर राजग के शीर्ष नेताओं की एक आपातकालीन बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में विपक्ष के खिलाफ देशव्यापी प्रचार अभियान चलाने की रणनीति तैयार की गई है। राजग का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच यह संदेश ले जाना है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने न केवल महिला सशक्तिकरण की राह रोकी है, बल्कि एससी-एसटी समुदायों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने वाले अवसर को भी गंवा दिया है।
कैबिनेट की बैठक और आगामी कदम
विधेयकों की विफलता के बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। हालांकि इस बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं कि सरकार इन विधेयकों को लेकर कोई बड़ा अध्यादेश या वैकल्पिक रास्ता निकालने पर विचार कर सकती है। राजग यह स्पष्ट करने की कोशिश में है कि परिसीमन और सीट वृद्धि से किसी भी राज्य को राजनीतिक नुकसान नहीं होने वाला था।
विपक्ष पर वादाखिलाफी का आरोप
सत्ता पक्ष का आरोप है कि कांग्रेस, सपा और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों ने विकासवादी सोच का विरोध किया है। राजग का तर्क है कि यदि सीटों की संख्या बढ़ती, तो नई जनगणना के बाद एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में भी स्वत: वृद्धि होती। इसके अलावा, जाति जनगणना के आधार पर आने वाले समय में ओबीसी प्रतिनिधित्व को लेकर भी सदन फैसला ले सकता था, जिसे विपक्ष ने बाधित कर दिया है।
