नई दिल्ली:- नारी शक्ति वंदन अधिनियम कानून पास होने के बावजूद तुरंत लागू क्यों नहीं हुआ, और इसके रास्ते में जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें क्यों है? सदन में संशोधन विधेयक पास नहीं होने पर अब क्या होगा? पूरा मामला क्या है। बता दें कि इस कानून के तहत महिलाओं को 15 साल के लिए आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है,
महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में बराबरी का प्रतिनिधित्व दिलाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। इस दिशा में 2023 ‘ नारी शक्ति वंदन अधिनियम ‘ के रूप में महिला आरक्षण कानून पारित हुआ। लेकिन यह कानून पास होने के बावजूद तुरंत लागू क्यों नहीं हुआ, और इसके रास्ते में जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें क्यों है? सदन में संशोधन विधेयक पास नहीं होने पर अब क्या होगा? पूरा मामला क्या है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम कब आया?
संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम 2023, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है, संसद ने 21 सितंबर 2023 को पास किया। इसके बाद 29 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान किया गया। हालांकि, इसे तुरंत लागू नहीं किया गया, बल्कि इसके साथ एक शर्त जोड़ी गई कि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
पहले क्या शर्तें लगाई गई थी?
इस कानून के तहत महिलाओं को 15 साल के लिए आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है, जिसे बाद में संसद चाहें तो बढ़ा सकती है। सबसे अहम शर्त यह है कि आरक्षण लागू करने से पहले टेश में नई जनगणना होनी जरूरी है और इसके बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा।
परिसीमन जन गणना के बारे मे संविधान क्या कहता है?
संविधान का अनुच्छेद 82 यह प्रावधान करता है कि हर जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का पुनर्समायोजन किया जा सकता है। इसके लिए एक डीलिमिटेशन ऐक्ट के तहत परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है, जो सीटों की संख्या और सीमाएं तय करता है।
क्या है परिसीमन आयोग और कब-कब बना?
परिसीमन आयोग एक हाई पावर कमिटी होती है, जिसे संसद के कानून के तहत बनाया जाता है। इसमें आमतौर पर तीन सदस्य होते हैं और इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस करते हैं। इसकी सिफारिशें अंतिम मानी जाती हैं। और इनमें बदलाव नहीं किया जा सकता। अब तक 1952, 1963, 1973 और 2002 में ऐसे आयोग बनाए जा चुके हैं।
परिसीमन पर रोक कब लगी?
2001 की जनगणना के बाद 2002 में परिसीमन आयोग बना, लेकिन 84वें संविधान संशोधन के जरिए अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने परिसीमन पर 25 साल की रोक लगा दी थी। यह रोक 2026 में खत्म हो रही है। इसलिए मौजूदा व्यवस्था के अनुसार अब 2026 के बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
सरकार को नया संविधान संशोधन बिल क्यों लाना पड़ा?
चूंकि महिला आरक्षण लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है और इसमें समय लग सकता है, इसलिए सरकार ने इसे जल्दी लागू करने के लिए 131वां संविधान संशोधन बिल लाने की कोशिश की। इसका मकसद परिसीमन पर लगी रोक हटाना और बिना नई जनगणना के भी परिसीमन कराकर महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता बनाना था।
131वे संशोधन बिल मे क्या था?
इस बिल में लोकसभा सीटों 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने, परिसीमन पर लगी रोक हटाने, जनसंख्या की परिभाषा बदलने और नई जनगणना के बिना ही परिसीमन कराने जैसे प्रस्ताव शामिल थे। इसके जरिए सरकार महिला आरक्षण को जल्द लागू करना चाहती थी।
सरकार और विपक्ष के दावे?
सरकार का कहना था कि परिसीमन के बाद राज्यों के बीच संतुलन बना रहेगा और किसी भी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होगा। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि इससे राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है, ओबीसी जैसे मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सरकार बहुमत में होने के बावजूद बिल पास क्यों नही हुआ?
वह संविधान संशोधन बिल था, इसलिए इसे पास करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी था। कुल 543 सीटों के हिसाब से यह आंकड़ा 362 बनता है। वोटिंग में सरकार को 298 वोट मिले, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। जरूरी बहुमत न मिलने के कारण यह बिल पास नहीं हो पाया।
संशोधन बिल गिरने के बाद क्या स्थिति है?
131वां संशोधन बिल गिरने के बाद स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। यानी 2023 का महिला आरक्षण कानून अभी भी लागू है, लेकिन उसकी शर्तें भी वैसी ही हैं। 16 अप्रैल 2026 को सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, लेकिन इसे लागू करने के लिए पहले जनगणना और फिर परिसीमन होना जरूरी है।
क्या महिलाओ को अब आरक्षण नही मिलेगा?
महिला आरक्षण कानून बन चुका है, लेकिन इसे लागू करने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रियाएं बाकी हैं। जब तक जनगणना और परिसीमन पूरा नहीं होगा, तब तक महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। यानी कानून है, लेकिन उसका असर जमीन पर आने में अभी समय लगेगा।
