नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर विवाद बढ़ गया है, जिसमें 714 प्रमुख हस्तियों ने इसे ‘आदर्श आचार संहिता’ का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। करीब 714 नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व नौकरशाहों ने चुनाव आयोग से शिकायत कर इसकी जांच की मांग की है। आरोप है कि यह संबोधन आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट और गंभीर उल्लंघन है।
क्या है शिकायतकर्ताओं का आरोप
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर 33% महिला आरक्षण को लेकर हमला बोला, जो चुनावी माहौल में पक्षपातपूर्ण प्रचार की श्रेणी में आता है। उनका आरोप है कि सरकारी तंत्र और सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया गया, जिससे निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना प्रभावित होती है।
आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन
याचिका में कहा गया है कि अगर यह संबोधन चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना प्रसारित किया गया है, तो यह आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है। ऐसे में आयोग को इस भाषण को सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, सरकारी वेबसाइटों और मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटाने का निर्देश देना चाहिए और जिम्मेदार पक्षों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
किन नेताओं ने शिकायत पर किए हस्ताक्षर
शिकायत पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग , पूर्व आईएएस एम. जी. देवसहायम, शिक्षाविद जोया हसन, संगीतकार टी. एम. कृष्णा और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबोधन दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी माध्यमों पर लाइव प्रसारित किया गया जो पूरी तरह सार्वजनिक धन से संचालित होते हैं।
शिकायतकर्ताओं ने चुनाव आयोग से की मांग
इसे सत्ता पक्ष को अनुचित लाभ देने वाला बताया गया है। शिकायतकर्ताओं ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह संबोधन की सामग्री और प्रसारण की प्रक्रिया की जांच करे, ट्रांसक्रिप्ट का परीक्षण करे और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे ताकि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनी रहे।
