नई दिल्ली:– गर्मियों में तेज धूप, उमस और गर्म हवाएं अक्सर हमारी आंखों पर बुरा प्रभाव डालती है। इसके अलावा आज के डिजिटल युग में लोगों को घंटों काम या पढ़ाई के सिलसिले में स्क्रीन के आगे बैठना पड़ता है। यही कारण है कि डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या काफी बढ़ गई है। इसमें आंखों में सूखापन, भारीपन और जलन महसूस होती है। अगर आप भी इस तरह की समस्या से परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है।
आज हम आपको गर्मियों में आंखों की देखभाल का एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं जो मिनटों में आराम दे सकता है। आंखों की देखभाल के लिए कोल्ड कॉटन पैड का इस्तेमाल सबसे आसान, सुरक्षित और असरदार घरेलू उपाय माना जाता है। यह आंखों की गर्मी को शांत करने और थकान मिटाने के लिए सबसे प्राकृतिक तरीके है। यह उपाय बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी के लिए सुरक्षित है।इस्तेमाल करने का तरीका
आंखों को तुरंत राहत देने के लिए आपको बस कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे।
सबसे पहले अपने चेहरे को ताजे और साफ पानी से धो लें ताकि पसीना और धूल-मिट्टी साफ हो जाए।
दो साफ और नरम सूती पैड लें। इन्हें एक कटोरी ठंडे पानी में डुबोएं। ध्यान रहे कि पानी ठंडा हो लेकिन बर्फ जैसा जमा देने वाला न हो।
पैड को हल्का सा निचोड़ लें ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए। अब शांति से लेट जाएं और अपनी आंखें बंद करके इन पैड्स को पलकों पर रख लें।
कम से कम 10 से 15 मिनट तक इसी अवस्था में रहें। इस दौरान गहरी सांस लें और अपनी आंखों को पूरी तरह आराम दें।
क्यों मिलता है इससे आराम
ठंडक आंखों के आसपास की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ती है जिससे सूजन कम होती है और मांसपेशियों को तुरंत रिलैक्सेशन मिलता है। यदि आप पानी में 2-3 बूंदें गुलाब जल मिला लेते हैं तो यह आंखों की चमक बढ़ाने और ताजगी देने में मदद करता है।कब करें इस्तेमाल
ऑफिस या वर्क फ्रॉम होम के दौरान स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने के बाद।
धूप से बाहर लौटने पर जब आंखों में जलन महसूस हो।
रात को सोने से पहले ताकि आंखों की दिनभर की थकान दूर हो सके।
आयुर्वेद के अनुसार आंखों में गर्मी बढ़ने से जलन होती है। ठंडे पानी का सेक इस पित्त को शांत करता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आंखों में लगातार दर्द बना रहे, पानी आए या धुंधलापन महसूस हो तो घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हमेशा साफ कॉटन का ही प्रयोग करें ताकि किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा न रहे।
