नई दिल्ली:– भारत इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है जिसका सीधा असर देश के ऊर्जा क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। बिजली मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह के अंत में भारत में बिजली की मांग ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और यह अब तक के उच्चतम स्तर 252.07 गीगावाट (GW) पर पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में अचानक हुई वृद्धि के कारण एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य कूलिंग उपकरणों के बड़े पैमाने पर उपयोग ने ग्रिड पर दबाव बढ़ा दिया है।
टूट गए पिछले सभी पुराने रिकॉर्ड
बिजली की मांग में यह उछाल बेहद चौंकाने वाला है। इससे पहले बिजली की अधिकतम मांग का रिकॉर्ड 250 गीगावाट था, जो मई 2024 में दर्ज किया गया था। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि मात्र दो दिनों के भीतर मांग में भारी वृद्धि हुई है 22 अप्रैल को जो डिमांड 239.70 गीगावाट थी। वह 24 अप्रैल को बढ़कर 252.07 गीगावाट हो गई। हालांकि, सरकार ने इस सीजन के लिए 270 गीगावाट का अनुमान लगाया था, लेकिन वर्तमान मांग उस अनुमान से फिलहाल थोड़ी कम है।
क्यों बढ़ रही है बिजली की खपत?
रिकॉर्ड तोड़ खपत के पीछे केवल मौसम ही एकमात्र कारण नहीं है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के महानिदेशक कृष्ण चंद्र पाणिग्रही के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी (LPG) की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय उपभोक्ता अब तेजी से इंडक्शन-आधारित खाना पकाने (Induction Cooking) की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
इस बदलाव के कारण वितरण स्तर पर बिजली की मांग में 13 से 27 गीगावाट की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बढ़ते डेटा सेंटर भी भविष्य में इस मांग को तीन गुना तक बढ़ा सकते हैं।
सरकार की तैयारी
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बिजली मंत्रालय सक्रिय रूप से काम कर रहा है। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह ने जानकारी दी है कि भारत अप्रैल से जून 2026 के बीच 22 गीगावाट से अधिक की नई क्षमता जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें 3.5 गीगावाट थर्मल पावर, 10 गीगावाट सौर ऊर्जा, 2.5 गीगावाट पवन ऊर्जा, 1.9 गीगावाट बैटरी स्टोरेज और 750 मेगावाट जलविद्युत शामिल है।
बिजली क्षेत्र में निवेश के बड़े अवसर
बढ़ती मांग के बीच भारत के बिजली क्षेत्र को मजबूत नीतिगत समर्थन मिल रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में 65-70 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय (Capex) के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि मई और जून में गर्मी और भी भीषण हो सकती है जिससे बिजली की खपत में और अधिक इजाफा होने की संभावना है। ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में निवेश देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य हो गया है।
