मध्यप्रदेश:– महिलाओं के सशक्तीकरण को केंद्र में रखते हुए विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र सोमवार को सुबह 11 बजे से आयोजित किया जाएगा। इस सत्र को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और इसके हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर टकराव के आसार
सत्र का मुख्य मुद्दा नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ा रहेगा। लोकसभा में इस अधिनियम से संबंधित संशोधन विधेयक के गिरने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर संसद में इस विधेयक का विरोध किया, जो नारी शक्ति का अपमान है। इसे कांग्रेस का पलटवार, आरक्षण लागू करने की मांग
वहीं, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती। कांग्रेस का आरोप है कि वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पारित अधिनियम को अब तक लागू नहीं किया गया। पार्टी का मानना है कि परिसीमन के बहाने इस कानून को टाला जा रहा था, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर विफल किया। कांग्रेस सदन में महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने के लिए संकल्प पेश करेगी और वर्तमान 543 लोकसभा सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग रखेगी।
महिला आरक्षण में अब ओबीसी कोटे की मांग करेगी कांग्रेस,
लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने पर कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है। पार्टी SC/ST वर्ग के साथ पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी इसमें शामिल करना चाहती है। इस मांग को बुलंद करने के लिए राज्यों में ओबीसी सम्मेलन किए जाएंगे। पार्टी की ओबीसी सलाहकार परिषद में इस पर चर्चा भी हो चुकी है और अब कार्ययोजना तैयार होगी। उधर, मध्य प्रदेश विधानसभा के 27 अप्रैल को होने वाले एक दिवसीय विशेष सत्र में इसकी मांग उठाई जाएगी।राज्यों में होंगे सम्मेलन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और ओबीसी काउंसिल के सदस्य जीतू पटवारी का कहना है कि इस बार जाति आधारित गणना होनी हैं। इसमें परिदृश्य साफ हो जाएगा। 33 प्रतिशत महिला आरक्षण में एससी-एसटी वर्ग के साथ ओबीसी का भी कोटा होना चाहिए। वर्तमान नारी शक्ति वंदन अधिनियम में इसका कोई प्रविधान नहीं है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि सभी वर्गों की महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
इस मांग को कांग्रेस बुलंद करेगी। राज्यों में सम्मेलन किए जाएंगे। इसे लेकर पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कार्ययोजना बना रही है। इसके साथ ही प्रदेश में अलग-अलग स्तर से भी यह बात उठाई जाएगी। प्रदेश कांग्रेस के अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग को इसका जिम्मा दिया जाएगा कि वह विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के साथ समाज के प्रबुद्धजन के साथ संगोष्ठियां करे। इसमें जो बात सामने आएगी, उसे आगे बढ़ाया जाएगा।
बैठकों और रणनीति पर जोर
सत्र से पहले सुबह 9 बजे भाजपा और कांग्रेस विधायक दल की बैठकें होंगी। भाजपा ने तय किया है कि इस सत्र में महिला मंत्री और विधायक अग्रणी भूमिका निभाएंगी और सरकार की उपलब्धियों को प्रस्तुत करेंगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव भी नारी सशक्तीकरण पर सरकार की नीति और दृष्टिकोण सदन में रखेंगे।
