मध्य प्रदेश:- अब न्यूनतम मजदूरी तय करने का पैमाना सिर्फ काम के घंटे नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरतें होंगी। मध्य प्रदेश सरकार एक नया फॉर्मूला तैयार कर रही है, जिसमें मजदूर के भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे खर्चों को ध्यान में रखकर वेतन तय किया जाएगा।
इन मानकों पर होगा निर्धारण
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, मजदूरी का निर्धारण इस आधार पर होगा कि श्रमिक को प्रतिदिन कम से कम 2700 कैलोरी ऊर्जा देने वाला भोजन मिल सके। इसके साथ ही एक परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़े की आवश्यकता को भी मानक माना गया है। भोजन और वस्त्र पर होने वाले खर्च का 20 प्रतिशत हिस्सा मकान किराए के लिए, 10 प्रतिशत ईंधन और बिजली पर, जबकि 20-20 प्रतिशत बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन जैसे मदों पर जोड़ा जाएगा।
लागू होगी नई मजदूर संहिता
सरकार इसके लिए नई “मध्य प्रदेश मजदूरी संहिता नियम” लागू करने की तैयारी में है। इसके लागू होने के बाद पुराने कानून—मध्य प्रदेश न्यूनतम वेतन अधिनियम 1958 और मजदूरी भुगतान नियम 1962—को समाप्त किया जाएगा।
मांगे सुझाव
नए नियमों में परिवार को भी एक इकाई मानते हुए गणना की जाएगी, जिसमें श्रमिक, उसका जीवनसाथी और दो बच्चों को शामिल किया गया है। श्रम विभाग ने इस संहिता का ड्राफ्ट जारी कर 45 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद अंतिम नियम लागू किए जाएंगे।
कार्यावधि का भी निर्धारण
इसके अलावा कार्य समय को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। किसी भी श्रमिक से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जाएगा, जबकि एक दिन में अधिकतम कार्य अवधि 12 घंटे तय की गई है। लगातार पांच घंटे से अधिक काम कराना भी नियमों के खिलाफ होगा।
