नई दिल्ली:– अगर आपने कभी मॉल में कोई ड्रेस या टी-शर्ट ट्रायल रूम में पहनकर खुद को बेहद स्टाइलिश महसूस किया हो, लेकिन वही कपड़ा घर पहुंचते ही उतना खास न लगा हो, तो आप अकेले नहीं हैं। दरअसल इसके पीछे कपड़ों का नहीं बल्कि ट्रायल रूम की स्मार्ट डिजाइनिंग, लाइटिंग और मिरर टेक्नोलॉजी का बड़ा रोल होता है। शॉपिंग स्टोर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ट्रायल रूम को इस तरह तैयार करते हैं कि कपड़े ज्यादा सुंदर और फिट नजर आएं।
विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रायल रूम में इस्तेमाल होने वाली ‘वॉर्म लाइटिंग’ सबसे बड़ा कारण होती है। ये लाइटें इस तरह लगाई जाती हैं कि चेहरे और शरीर पर कम शैडो पड़े। इससे स्किन ज्यादा ग्लोइंग दिखती है और कपड़ों के रंग अधिक चमकदार और प्रीमियम नजर आते हैं। वहीं घरों में इस्तेमाल होने वाली सामान्य सफेद रोशनी या ट्यूबलाइट कपड़ों का असली रंग और फिटिंग दिखा देती है।
इसके अलावा ट्रायल रूम में लगे शीशे भी सामान्य नहीं होते। कई स्टोर्स ऐसे मिरर इस्तेमाल करते हैं जो हल्के झुके हुए होते हैं या ‘स्लिमिंग मिरर’ टेक्नोलॉजी पर काम करते हैं। इससे व्यक्ति थोड़ा लंबा, फिट और आकर्षक दिखाई देता है। यही वजह है कि ट्रायल रूम में कपड़े ज्यादा परफेक्ट लगते हैं और खरीदने का मन जल्दी बन जाता है।
सिर्फ लाइट और शीशे ही नहीं, बल्कि ट्रायल रूम का माहौल भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। वहां साफ-सफाई, अच्छी खुशबू और AC की ठंडक लोगों को रिलैक्स महसूस कराती है। शांत और आरामदायक माहौल में व्यक्ति खुद को ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करता है, जिससे साधारण कपड़े भी बेहद शानदार लगने लगते हैं।
यानी अगली बार जब ट्रायल रूम में कोई ड्रेस आपको “परफेक्ट” लगे, तो समझ जाइए कि इसके पीछे फैशन के साथ-साथ साइकोलॉजी और स्मार्ट मार्केटिंग का भी बड़ा खेल छिपा है।
