नई दिल्ली:– महंगाई के इस दौर में आज हर मिडिल क्लास परिवार के सामने यह एक बहुत बड़ा और उलझाने वाला सवाल खड़ा है। लोग लगातार सोच रहे हैं कि किराये पर रहना ज्यादा समझदारी है या फिर अपना घर खरीदकर हर महीने EMI चुकाना बेहतर विकल्प है। बढ़ती हुई प्रॉपर्टी कीमतें, लोन पर ऊंची ब्याज दरें और रोजमर्रा के खर्चों में भारी इजाफा लोगों के इस आर्थिक फैसले को और भी मुश्किल बना रहा है। एक तरफ 30 हजार रुपये का मासिक किराया जेब पर हल्का लगता है, तो दूसरी तरफ 70 हजार रुपये की भारी EMI भविष्य में एक संपत्ति बनाने का सपना दिखाती है।
क्या सिर्फ अपना घर होने की भावना ही इस बड़े फैसले के लिए काफी है या फिर घर का आर्थिक गणित कुछ और ही कहानी कहता है? किराये पर रहने का सबसे बड़ा फायदा लचीलापन है, जिससे आप अपनी नौकरी या जरूरत के हिसाब से बहुत ही आसानी से अपनी लोकेशन बदल सकते हैं। 30 हजार रुपये का किराया घर की EMI के मुकाबले काफी कम है, जिससे बचे हुए पैसों को आप आसानी से किसी अच्छे निवेश या बचत में लगा सकते हैं। इसके अलावा घर के मेंटेनेंस और हर साल लगने वाले प्रॉपर्टी टैक्स जैसी सारी बड़ी जिम्मेदारियां भी पूरी तरह सिर्फ मकान मालिक की ही होती हैं। घर खरीदने के प्रमुख फायदे
घर खरीदने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि आप एक स्थायी संपत्ति बनाते हैं जो आपके और परिवार के भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित करती है। आपको 70 हजार रुपये EMI का खर्च भले ही ज्यादा लगे, लेकिन वास्तव में यह एक बेहतरीन निवेश भी है जो लंबे समय में आपकी संपत्ति को काफी बढ़ाता है। इसके साथ ही आपको हर महीने किराये की अनिश्चितता और बार-बार घर बदलने के तनाव से पूरी तरह छुटकारा मिलता है और सुरक्षा का अहसास होता है।
वित्तीय जानकारों के अनुसार अगर घर की EMI आपकी कुल आय का 30-40% से ज्यादा है, तो यह आपके मासिक बजट पर बहुत भारी पड़ सकता है। वहीं, इसके विपरीत मासिक किराया कम होने पर आप बचत और अन्य निवेश विकल्पों के जरिए भविष्य में बहुत ही बेहतर आर्थिक रिटर्न हासिल कर सकते हैं। हालांकि, यह बात भी पूरी तरह सच है कि लंबे समय में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने का जो बड़ा फायदा होता है, उसे भी बिल्कुल नजरअंदाज नहीं कर सकते।
