नई दिल्ली:– समाज में हम अक्सर बराबरी और मानवता की बड़ी-बड़ी बातें सुनते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर से आई एक खबर ने इंसानियत को एक बार फिर शर्मसार कर दिया है। प्यास बुझाने जैसे बुनियादी काम के लिए एक बाप-बेटे को ऐसी सजा दी गई है जिसे सुन आपकी भी रूह कांप जाएगी।
यह हृदय विदारक घटना सचेंडी थाना क्षेत्र के झखरा संभरपुर गांव की है। बीती 2 मई की रात को एक दलित मजदूर अपने 16 वर्षीय बेटे के साथ खेतों में काम कर रहा था। काम के दौरान बेटे को प्यास लगी, तो वह पास ही लगे एक सरकारी हैंडपंप पर पानी पीने चला गया। वहां रखे कुछ बर्तनों का उपयोग करना उस किशोर के लिए काल बन गया।
आरोप है कि जैसे ही उसने वहां रखी बाल्टी और लोटे को हाथ लगाया, वहां मौजूद दबंगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। संजय राजपूत, उसका भाई दीपक और उनके साथियों ने किशोर को जातिसूचक गालियां देना शुरू कर दिया। दबंगों का तर्क था कि ‘नीच जाति’ के लड़के ने बर्तन छूकर उनका धर्म और पानी दोनों भ्रष्ट कर दिए हैं।
मुर्गा बनाकर पीटा, जूते से पिलाया पानी
दबंगों की क्रूरता यहीं नहीं रुकी। उन्होंने उस मासूम किशोर को बीच सड़क पर घसीटा और उसे निर्वस्त्र कर दिया। इसके बाद उसे ‘मुर्गा’ बनने पर मजबूर किया गया और लाठी-डंडों के साथ-साथ लात-घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। रिपोर्ट्स की मानें तो पीड़ित पिता ने जो आपबीती सुनाई वह किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार करने के लिए काफी है। पिता के अनुसार, हमलावरों ने अपना जूता उतारकर उसमें थूका और उस किशोर को चाटने पर मजबूर किया। इतना ही नहीं, जूते में पानी भरकर उसे पीने के लिए विवश किया गया। जब पिता बेटे को बचाने दौड़ा, तो दबंगों ने उसे भी नहीं बख्शा। इस खौफनाक हमले में पिता की पसलियां टूट गईं और उसके बेटे का हाथ फ्रैक्चर हो गया।
एफआईआर लिखने में लग गए 13 दिन
हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर और अमानवीय घटना होने के बावजूद यूपी पुलिस ने मामला दर्ज करने में 13 दिन लगा दिए। घटना 2 मई की है, लेकिन प्राथमिकी काफी देरी से दर्ज की गई। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में खेत में कूड़ा या डायपर फेंकने को लेकर पुराना विवाद भी सामने आया है।
हालांकि, जिस तरह की बर्बरता किशोर के साथ की गई उसने विवाद के हर दूसरे पहलू को पीछे छोड़ दिया है। सचेंडी थाना प्रभारी ने बताया कि चारों नामजद आरोपियों- संजय, दीपक, सागर और पटिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एसीपी पनकी खुद इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच कर रहे हैं, ताकि पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिल सके।
