नई दिल्ली:– प्रधानमंत्री के नीदरलैंड दौरे ने गुजरात की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी ‘कल्पसर योजना’ को नई उम्मीद दी है। खंभात की खाड़ी में प्रस्तावित इस मेगा प्रोजेक्ट को अब नीदरलैंड की विश्वस्तरीय जल प्रबंधन तकनीक और विशेषज्ञता का सहयोग मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने डच समकक्ष के साथ विश्व प्रसिद्ध ‘अफस्लुइटडिज्क’ बांध का दौरा किया, जिसे आधुनिक जल प्रबंधन और समुद्री इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। माना जा रहा है कि इसी मॉडल और तकनीकी अनुभव का उपयोग गुजरात की कल्पसर परियोजना को साकार करने में किया जाएगा।
भारत-नीदरलैंड के बीच हुआ अहम समझौता
कल्पसर परियोजना को तकनीकी सहयोग देने के लिए भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (LoI) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस सहयोग के तहत दोनों देश समुद्री बांध निर्माण, जल संरक्षण, जलवायु अनुकूलन और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इससे गुजरात की इस बहुचर्चित परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
क्या है कल्पसर योजना?
कल्पसर योजना गुजरात की खंभात की खाड़ी में एक विशाल बांध बनाकर समुद्र में मिलने वाली सात नदियों के पानी को संरक्षित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना है। इस योजना का उद्देश्य केवल मीठे पानी का विशाल जलाशय बनाना नहीं है, बल्कि इसके जरिए सिंचाई, पेयजल, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा देना है। इस परियोजना की परिकल्पना उस समय की गई थी जब Narendra Modi गुजरात के मुख्यमंत्री थे। साल 2004 में परियोजना के लिए समुद्री सर्वेक्षण की शुरुआत भी की गई थी।
योजना से गुजरात को क्या होगा फायदा?
कल्पसर परियोजना लागू होने के बाद गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
संभावित बड़े फायदे:
सौराष्ट्र के 9 जिलों के 42 तालुकों में करीब 10 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा
दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच दूरी 240 किमी से घटकर लगभग 60 किमी
लगभग 1500 मेगावाट पवन ऊर्जा उत्पादन
करीब 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन
पर्यटन और मत्स्य उद्योग को बढ़ावा
जल संकट और सूखे की समस्या से राहत
‘अफस्लुइटडिज्क’ क्यों है खास?
नीदरलैंड का ‘अफस्लुइटडिज्क’ बांध दुनिया की सबसे सफल जल प्रबंधन परियोजनाओं में गिना जाता है। करीब 32 किलोमीटर लंबे इस बांध ने उत्तरी सागर के खारे पानी को रोककर एक विशाल मीठे पानी की झील बनाई है। यह बांध बाढ़ नियंत्रण, जल संरक्षण, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। अब भारत इसी तकनीकी अनुभव का फायदा गुजरात की कल्पसर परियोजना में उठाने की तैयारी कर रहा है।
गुजरात के लिए खुलेंगे विकास के नए रास्ते
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कल्पसर योजना सफल होती है तो यह गुजरात की अर्थव्यवस्था, कृषि और जल सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीदरलैंड यात्रा और दोनों देशों के बीच हुए समझौते ने इस परियोजना को नई गति दी है। समुद्री इंजीनियरिंग में नीदरलैंड के 90 वर्षों से अधिक के अनुभव का लाभ अब सीधे भारत और गुजरात को मिलने वाला है। कल्पसर योजना केवल एक जल परियोजना नहीं, बल्कि गुजरात के भविष्य की आधारशिला मानी जा रही है। जल संकट, ऊर्जा उत्पादन और क्षेत्रीय विकास जैसे कई बड़े लक्ष्यों को साथ लेकर चल रही यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारत की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल हो सकती है।
