छत्तीसगढ़:- बस्तर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक हुई. इस बैठक में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के सीएम ने भी हिस्सा लिया. इस दौरान केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, विकास समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई. वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने पिछली कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना भी साधा है.
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का गढ़ कहे जाने वाले बस्तर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक हुई. इस बैठक में छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय समेत अन्य चार राज्यों के भी सीएम शामिल हुए हैं. इनमें मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हिस्सा लिया. इस बैठक में केंद्र और अन्य राज्यों के बीच समन्वय, विकास और प्रशासनिक विषयों पर चर्चा की गई.
इस बैठक के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सुरक्षाबलों के साहस, पराक्रम और बलिदान के चलते देश में 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करके लक्ष्य हासिल कर लिया गया. उन्होंने कहा कि अक्सर कहा जाता रहा है कि विकास की कमी के कारण ही नक्सलवाद पनपा है. लेकिन वास्तविकता यह है कि नक्सलवाद ही विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा है. इतना ही नहीं उन्होंने कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा है.
नक्सलवाद ही विकास में सबसे बड़ी बाधा
अक्सर यह कहा जाता रहा कि विकास की कमी के कारण नक्सलवाद पनपा, लेकिन वास्तविकता यह है कि नक्सलवाद ही विकास में सबसे बड़ी बाधा बना. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार से उन्हें नक्सलवाद को खत्म करने में सहयोग नहीं मिला है. उन्होंने आगे कहा कि अब 19 मई से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास की नई परिकल्पना की शुरुआत की गई. जिन इलाकों में कभी सुरक्षाबलों के बड़े कैंप स्थापित थे. जहां पर सीआरपीएफ और डीआरजी के लगभग 270 जवान क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात रहते थे. वहां पर अब विकास के नए केंद्र तैयार किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बस्तर के नक्सल मुक्त होने के बाद 70 कैंपों में से लगभग एक-तिहाई कैंपों को ‘वीर शहीद गुंडाधर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है.
इन केंद्रों में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी
गृहमंत्री अमित शाह ने आगे कहा कि इन सेवा केंद्रों में बैंकिंग, डिजिटल सेवाएं और शासन की अलग-अलग योजनाओं की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी. इसके अलावा, यहां पर प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी और अन्य जरूरी सेवाएं भी संचालित की जाएंगी. जिससे ग्रामीणों को विकास से जुड़ी हर सुविधा स्थानीय स्तर पर आसानी से मिल सके. ये केंद्र सिर्फ प्रशासनिक सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र भी बनेंगे. खासकर महिलाओं की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी. वहीं उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन उपलब्ध कराए जाएंगे.
