नई दिल्ली:– बीड बस स्टैंड पर हुई इस अमानवीय घटना ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है। एक महिला अपने दो छोटे बच्चों को लेकर तुलजापुर से छत्रपति संभाजीनगर जा रही राज्य परिवहन की बस में चढ़ी। अभी बस बीड डिपो के पास रुकी ही थी कि महिला ने बच्चों को सीट पर अकेले बैठे रहने को कहा और खुद नीचे उतर गई। बस स्टैंड के बाहर पहले से ही स्कूटी लेकर इंतजार कर रहे अपने प्रेमी के साथ वह त्रिपोलिया की तरफ तेजी से फरार हो गई। काफी देर तक जब मां वापस नहीं लौटी, तो सह-यात्रियों ने बच्चों को रोते देख बस कंडक्टर और डिपो प्रशासन को सूचित किया।
बस कर्मियों ने जब बच्चों को नीचे उतारा और उनकी जेबों की तलाशी ली, तो उसमें से यवतमाल का एक पता और मोबाइल नंबर लिखी हुई चिट्ठी बरामद हुई। उस चिट्ठी में जानबूझकर झूठ लिखा गया था कि इन बच्चों के माता-पिता अब जीवित नहीं हैं और इन्हें यवतमाल के शारदा चौक पर पहुंचा दिया जाए। बीड पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए दोनों रोते हुए बच्चों को बीड जिला बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया, जहाँ उन्हें खाना और आश्रय दिया गया।
पोतों की हालत से ज्यादा दादा को थी पैसों की फिक्र
चिट्ठी पर लिखे नंबर के आधार पर जब बाल कल्याण समिति ने यवतमाल में बच्चों के दादा से संपर्क किया, तो वे अगले दिन बीड पहुंचे। लेकिन यहाँ आकर दादा ने जो बर्ताव किया, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। दादा ने संकट में फंसे अपने पोतों की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में पूछने के बजाय समिति के सदस्यों से कड़क लहजे में सवाल किया कि, “वह औरत घर से जो नकदी (पैसे) और हमारी स्कूटी लेकर भागी है, वह कहाँ है? पुलिस ने उसे जब्त किया या नहीं?” दादा के इस लालची और संवेदनहीन रवैये को देखकर वहां मौजूद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
फरार जोड़े की तलाश में जुटी बीड पुलिस
इस गंभीर और बच्चों को लावारिस छोड़ने (Child Abandonment) के मामले का संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस स्टेशन ने अज्ञात मां और उसके प्रेमी के खिलाफ बाल न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। बस स्टैंड और शहर के एग्जिट पॉइंट्स पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि उस स्कूटी के नंबर और फरार जोड़े की शिनाख्त कर उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
बाल कल्याण समिति की जनता से भावुक अपील
बीड बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष और सदस्यों ने इस घटना के बाद महाराष्ट्र के अभिभावकों से एक भावुक अपील जारी की है। समिति ने कहा है कि कोई भी माता-पिता गरीबी, पारिवारिक कलह या किसी अन्य व्यक्तिगत संकट के चलते अपने मासूम बच्चों को इस तरह सड़कों या बसों में बेसहारा न छोड़ें। यदि कोई परिवार बच्चों का पालन-पोषण करने में पूरी तरह असमर्थ है, तो वे कानूनी तौर पर बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंप सकते हैं, जहाँ सरकार उनकी सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उठाएगी।
