नई दिल्ली:– दरअसल विवाद की जड़ गीत के उन हिस्सों को माना जाता है, जिनमें देवी स्वरूपों का उल्लेख है। ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा था। शुरुआती दो पदों को व्यापक स्वीकृति मिली हुई है, लेकिन बाद के पदों को लेकर वर्षों से विवाद बना हुआ है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी अलग-अलग रही। कुछ नेताओं ने इसे राष्ट्रवाद का प्रतीक बताया, जबकि विपक्ष ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। अब केंद्र सरकार द्वारा कानूनी संशोधन की तैयारी और राज्यों में इसके बढ़ते अनिवार्य उपयोग के बीच ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक तथा संवैधानिक विषय बन सकता है।
