नई दिल्ली:– खराब लाइफस्टाइल के कारण कई बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। बच्चे हों या बुजुर्ग, महिलाएं हों या पुरुष हर किसी को लाइफस्टाइल से संबंधी समस्याएं हो रही हैं।
महिलाओं के सेहत की बात करें, तो महिलाएं सबसे ज्यादा एनीमिया की शिकार हैं। ये तब होता है जब आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है। इसके कारण थकान, कमजोरी और चक्कर आने जैसे लक्षण होते हैं। इसके साथ ही कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
महिलाओं में खून की कमी का कारण क्या?
महिलाओं में एनीमिया की समस्या बहुत आम है, लेकिन कई बार वे इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। एनीमिया का सबसे प्रमुख कारण महिलाओं द्वारा पोषण से भरपूर खाना न खाना भी है। एनीमिया तब होता है जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, जिससे खून में हीमोग्लोबिन का स्तर गिर जाता है।
एनीमिया के लक्षण
इसके कारण कमजोरी, थकान, सिर दर्द, चक्कर आना, हाथ-पैर ठंडे रहना, सांस फूलना और चेहरे व होंठों का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। कुछ महिलाओं को बाल झड़ने और नाखून कमजोर होने की भी समस्या हो सकती है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है और दिल से जुड़ी समस्याएं भी पैदा कर सकता है।
एनीमिया से बचने के उपाय
इससे बचने के लिए आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर आहार लेना जरूरी है, जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार, सेब, गुड़, दालें और सूखे मेवे। साथ ही, विटामिन सी वाले फलों जैसे संतरा, आंवला और नींबू का सेवन करना चाहिए। विटामिन सी शरीर में आयरन के अवशोषण में मदद करता है। अगर लगातार कमजोरी और थकान बनी रहे, तो डॉक्टर से खून की जांच करवानी चाहिए और सही इलाज लेना चाहिए।
एनीमिया के प्रकार
फोलेट की कमी के कारण होने वाला एनीमिया
जब शरीर को रेड ब्लड सेल के निर्माण के लिए पर्याप्त फोलेट नहीं मिलता है, तब मेगालोब्लास्टिक एनीमिया का कारण बनता है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं अपने सामान्य आकार से बड़ी हो जाती हैं।
आयरन की कमी
भारत में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया सबसे अधिक होता है। इसमें शरीर में पर्याप्त आयरन नहीं बनता और आयरन की कमी बढ़ती जाती है, जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर घटता जाता है।
क्रोनिक रोग एनीमिया
यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कोई इंफेक्शन है, तो उसे क्रोनिक एनीमिया हो सकता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन कम हो जाता है।
गर्भावस्था के कारण एनीमिया
ये तब होता है जब महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बच्चे के लिए ज्यादा रक्त की जरूरत होती है और महिलाएं उतनी मात्रा में संतुलित आहार का सेवन नहीं कर पाती है।
विटामिन बी12 की कमी के कारण होने वाला एनीमिया
लाल रक्त कोशिका के लिए आवश्यक विटामिन बी12 की कमी से के कारण फोलेट की कमी से समान मेगालोब्लास्टिक एनीमिया हो सकता है।
कैसे करें एनीमिया से बचाव
कॉफी-चाय का सेवन कम करें
अगर आप या आपका कोई जानने वाला एनीमिया से जूझ रहा है तो उसे चाय-कॉफी से दूर रहने की सलाह दें। दरअसल, चाय-कॉफी में मौजूद टैनिन शरीर में आयरन का अवशोषण कम कर देते हैं, जिसके चलते आयरन की कमी होने लगती है और एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है।
डाइट का रखें विशेष ध्यान
एनीमिया के मरीजों को अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताए गए खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। इसके अलावा अपनी डाइट में विटामिन बी 12, विटामिन ए, आयरन और फोलेट रीच फूड को खाने में शामिल करना चाहिए। साथ ही मसालेदार और खट्टे भोजन से दूर रहना चाहिए।
फलों को करें डाइट में शामिल
एनीमिया के मरीजों को अपनी डाइट में कुछ ऐसे फल जरूर शामिल करने चाहिए, जो आयरन का बढ़िया स्त्रोत हों। ऐसे मरीजों को अपनी डाइट में संतरा, अंगूर, अनार, कीवी और सेब जैसे खट्टे फल शामिल करना चाहिए।
शराब का सेवन बंद करें
अगर आप एनीमिया से जूझ रहे हैं तो शराब और धूम्रपान से दूर रहें। इसका सीधा असर रेड ब्लड सेल्स पर पड़ता है। यह शऱीर में अच्छे पोषक तत्वों का एब्जॉर्बशन रोक देता है।
हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन
एनीमिया से ग्रसित मरीजों को अपनी डाइट में हरी सब्जियां जरूर लेनी चाहिए। हरी सब्जियां आयरन और फोलेट का रिच सोर्स होती हैं, जो हीमोग्लोबिन और आरबीसी के निर्माण में मददगार होती हैं।
