नई दिल्ली:– गर्मी का मौसम चल रहा है इन दिनों और बाज़ार में तरावट वाले तरबूज से लेकर अघाकर खाए जाने वाले आम मौजूद हैं। स्वादिष्ट संतरे की भरमार है तो अनार का आनंद लेने वाले इसका ज्यूस मजे से पी रहे हैं। कुछ लोग तो सीजनल फलों के लिए गर्मी के मौसम का इंतजार ही इसलिए करते हैं कि वे अपने मनपसंद फल का जायका ले सकें। हम में से अधिकांश ऐसे ग्राहक होंगे जो अपना पसंदीदा फल खरीदकर लाते हैं लेकिन इसके बारे में बुनियादी बातें नहीं पता होतीं। आज हम आपको कुछ फलों के बारे में एकदम ज़मीनी और रोचक जानकारियां लेकर आए हैं जो आपके लिए उपयोगी साबित होंगी।
- तरबूज खरीदते वक्त उसके पके होने की पहचान ऐसे करें। अगर तरबूज की सतह का कुछ भाग पीला है तो यह प्रमाण है कि तरबूज पका, पानीदार और मीठा है। पीलापन इसलिए होता है क्योंकि ये रेत में रखे रहते हैं और उसकी गर्मी से इनकी उपरी परत छिल जाती है।
- पके तरबूज की एक पहचान यह भी है कि इसकी गांठ जिसे बीठ भी कहा जाता है, वह अगर अपने आप गिर जाए या हल्का सा उखाड़ने पर हाथ में आ जाए तो भी तरबूज पका हुआ है। कच्चे तरबूज की गांठ आसानी से अलग नहीं होती।
- तरबूज की फसल 90 दिनों में पककर पूरी तरह से तैयार होती है। बाड़ी में बेल लगाई जाती है। किसी नदी या जलाशय के किनारे बोने पर उसमें से 8 दिन में ही पीले फूल फूटते हैं और बाद 20 दिन में तरबूज पनपता है।
- कई स्थानों पर इसकी खेती तो होती है लेकिन अधिकांश व्यापारी राजस्थान से तरबूज मंगाकर यहां बेचते हैं। खास तौर पर भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और जयपुर से तरबूज मंगाया जाता है। ऊंटों से भी परिवहन करवाया जाता है।
- औसत रूप से देखा जाए तो गर्मी के सीजन में हर व्यापारी दो क्विंटल रोज बेच देता है।
- खरबूजे के साथ बाजार में जो शकरबटी देखने को मिलती है, वह असल में फसल ब्रीडिंग का उत्पाद है। इसलिए उसमें मिले जुले गुण पाए जाते हैं।
- पहले के समय में चीकू आकार में लंबे होते थे। बाद में हाइब्रिड होकर उनका आकार गोल हो गया। हाइब्रिड पद्धति ने पारंपरिक फलों के रूप, रंग, आकार व स्वाद भी बदल दिया है। आज की पीढ़ी जो फल खा रही है, वे उसके वास्तविक प्रकार से वंचित हैं।
- मध्य प्रदेश में गुजरात के वलसाड़ से बड़ी मात्रा में आम लाए जाते हैं। इनमें हापुस और राजापुरी आम खास हैं।
- उत्तर प्रदेश के बारलिया और बिहार से भी हापुस आम मंगाए जाते हैं।
- महाराष्ट्र के रत्नागिरी से जो हापुस आता है वह तौल से नहीं, दर्जन से बिकता है।
- काले अंगूर सामान्य अंगूर के मुकाबले अधिक मीठे इसलिए होते हैं क्योंकि वो हाइब्रिड होते हैं।
- पीपलगांव नासिक से गोल आकार के अंगूर लाए जाते हैं।
- अनार की मुख्य तौर पर चार प्रजातियां होती हैं। गणेश अनार, अरक्का, सेंदारिया और कलदारी।
- गणेश अनार पीला और आकार में बड़ा होता है। अरक्का हरा और लाल होता है। सेंदारिया महंगा और गुणवत्ता में भरपूर होता है। कलदारी महाराष्ट्र में अधिक पाया जाता है। यहां नासिक और मालेगांव से बुलवाया जाता है।
- आम खाने का सही समय बारिश या बारिश के बाद का है। इस समय इसकी मिठास बढ़ जाती है। आम की तो डेढ़ सौ प्रजातियां हैं जिनमें से बाजार में सभी एक साथ मिलना संभव नहीं है।
