मध्य प्रदेश :– दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के 15 जिलों में मानसून पहुंच चुका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। फिलहाल गुरुवार को राज्य के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की आशंका बनी हुई है, जबकि नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस और गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर समेत कई जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ गरज-चमक और बारिश का दौर भी देखने को मिल सकता है। प्रदेश के मध्य, पश्चिमी और महाकौशल क्षेत्रों में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने के संकेत हैं।
इन जिलों में पहुंचा मानसून
आलीराजपुर, इंदौर, धार, हरदा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में मानसून के पहुंचने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे आखिर में पहुंचेगा।
9 दिन की देरी से मानसून की एंट्री
इस वर्ष मानसून की एंट्री सामान्य तारीख से करीब नौ दिन देरी से हुई है। प्रदेश में मानसून आमतौर पर 15 जून तक पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री 24 जून को दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार किसी क्षेत्र में पर्याप्त बारिश, नमी वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाओं की सक्रियता और मौसम संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही मानसून की आधिकारिक घोषणा की जाती है।
47 जिलों में कम बारिश की संभावना
हालांकि इस बार बारिश को लेकर तस्वीर पूरी तरह उत्साहजनक नहीं है। भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक भोपाल, इंदौर और जबलपुर सहित प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। जहां औसत सालाना बारिश 37.3 इंच रहती है, वहीं इस बार 30 से 32 इंच बारिश का अनुमान लगाया गया है।
50% कम हुई बारिश
मानसून की देरी का असर शुरुआती बारिश के आंकड़ों में भी दिखाई दिया है। 1 जून से 24 जून तक प्रदेश में औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 42 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। यह सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर समेत 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।
