नई दिल्ली :–उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाला वेदांता समूह एक बार फिर भारी कर्ज जुटाने की तैयारी में है। रिपोर्टों के अनुसार, समूह की पैरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड लगभग 5.2 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब ₹43,000 करोड़) बॉन्ड और लोन के माध्यम से जुटाने की योजना बना रही है। इस कदम का उद्देश्य पुराने और अपेक्षाकृत महंगे कर्ज की रिफाइनेंसिंग करना बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जुटाई जाने वाली राशि का बड़ा हिस्सा 2028 से 2033 के बीच परिपक्व होने वाले लगभग 3.6 अरब डॉलर के बॉन्ड तथा 1.6 अरब डॉलर के लोन को चुकाने या पुनर्गठित करने में इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, लगातार नए कर्ज लेकर पुराने कर्ज चुकाने की रणनीति को लेकर वित्तीय बाजार में सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर समूह कब तक कर्ज के सहारे अपनी वित्तीय स्थिति संभाले रख पाएगा।
वेदांता समूह इस समय अपनी सूचीबद्ध कंपनी वेदांता लिमिटेड के पांच अलग-अलग कंपनियों में डीमर्जर की प्रक्रिया से भी गुजर रहा है। ऐसे समय में भारी उधारी की योजना निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि कंपनी का दावा है कि 31 मार्च तक उसका कुल कर्ज घटकर 4.9 अरब डॉलर रह गया है, जो पांच वर्ष पहले 8.9 अरब डॉलर था, लेकिन नई उधारी की तैयारी ने समूह की दीर्घकालिक वित्तीय रणनीति और कर्ज प्रबंधन को लेकर बहस फिर तेज कर दी है।
