राजनांदगांव:– जिला टीबी के मामले में राजनांदगांव जिला हाई रिस्क पर है। जिले में केन्द्र सरकार के निर्देश पर टीबी रोग मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिवसीय कार्यक्रम चला कर मरीजों को खोजा जा रहा। यहां हर वर्ष लगभग एक लाख संदिग्ध मरीजों की पहचान होती है। अब तक जिले की 407 ग्राम पंचायतों में से 238 पंचायतें ही टीबी – मुक्त घोषित हुई है। जो लगभग 58 प्रतिशत ही है ।यानी जिले में लगभग 42 प्रतिशत गांव अब तक टीबी मुक्त नहीं हो पाया है।
वर्षों से चल रहे टीबी उन्मूलन अभियान के बावजूद राजनांदगांव जिले में एक वर्ष में ही लगभग एक हजार से अधीक मरीज सामने आते हैं। ऐसे में पूरे अभियान की जमीनी हकीकत को समझा जा सकता है। टीबी रोग मुक्त भारत अभियान के तहत मरीज को ढूंढने की केवल औपचारिकता ही दिखाई दे रही है। शहर सहित गांव में सभी संदिग्ध मरीजों की जांच नहीं हो रही है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी नेतराम नवरतन ने बताया कि जिले में सौ दिवसीय जांच अभियान चलाया जा रहा है।
बीते वर्ष इस अभियान के तहत एक लाख संदिग्ध व्यक्ति मिले थे, इस वर्ष भी गांव- गांव में शिविर लगाकर जांच की जा रही है । उन्होंने बताया कि हमारा जिला 305 एआई के माध्यम से हाई रिस्क विलेज आईडेंटिफाई हुआ है । उन्होंने कहा कि अब तक 50 प्रतिशत गांव में शिविर लग चुका है। उन्होंने कहा कि अधिक मरीजों का खोज कर ट्रांसमिशन रोकना उद्देश्य है । वहीं उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में लगभग दो -ढाई हजार के करीब मरीज मिलते थे, लेकिन अब यह संख्या कम होकर 1 हजार के आसपास हो गई है ।
