नई दिल्ली:– जल्द ही सावन का पवित्र महीना शुरु होने वाला है। इस पूरे माह में शिव भक्त भक्ति के सागर में सराबोर हो जाते हैं। सावन में कई भक्त रूद्राभिषेक करते हैं और कई लोग रुद्राक्ष धारण करते हैं। हिंदू धर्म में रुद्राक्ष महज एक माला या श्रृंगार नहीं है, बल्कि रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रसाद माना जाता है।
कहां से आया है रुद्राक्ष?
रुद्राक्ष शब्द रुद्र और अक्ष से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है भगवान शिव और आंसू। शिव पुराण के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने सृष्टि के कल्याण के लिए लंबी तपस्या की। जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं तो करुणा के कारण उनके आंसू धरती पर गिरे और वहीं से रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पति हुई। इसलिए रुद्राक्ष को भगवान शिव का आशीर्वाद और करुणा का प्रसाद माना जाता है।
रुद्राक्ष एक खास तरह के पेड़ का बीज है। ये पेड़ आमतौर पर पहाड़ी इलाकों में एक खास ऊंचाई पर पाए जाते हैं। बता दें कि लंबे समय से इन पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल रेल की पटरी के नीचे बिछाने में किया जा रहा है, इसी वजह से आज देश में बहुत कम रुद्राक्ष के पेड़ बचे हैं। आज ज्यादातर रुद्राक्ष के पेड़ नेपाल, बर्मा, थाईलैंड या इंडोनेशिया में पाए जाते हैं। दक्षिण भारत में पश्चिमी घाट के कुछ इलाकों में भी ये पेड़ हैं, लेकिन सबसे अच्छी गुणवत्ता के रुद्राक्ष हिमालय में एक ऊंचाई के बाद मिलते हैं। असली रुद्राक्ष में एक वाइब्रेशन होता है।
रुद्राक्ष पहनने के फायदे
रुद्राक्ष धारण करने से मन को शांति और स्थिरता मिलती है। तनाव और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है और ध्यान व एकाग्रता बेहतर होने लगती है। रुद्राक्ष धारण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रुद्राक्ष को अपने हृदय में स्थान देने से आध्यात्मिक शांति मिलती है।
कितने प्रकार के होते हैं रुद्राक्ष?
नीलकंठ का प्रसाद रुद्राक्ष, एक मुखी से लेकर 21 मुखी तक होते हैं। हर रुद्राक्ष का अलग महत्व होता है। सबसे प्रचलित पंचमुखी रुद्राक्ष होता है, जिसे अधिकतर लोग धारण करते हैं। यह आपके ब्लड प्रेशर को कम करता है, आपकी तंत्रिकाओं को शांत करता है। वहीं सातमुखी, ग्यारहमुखी और अन्य रुद्राक्ष विशेष आध्यात्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय मान्यताओं से जुड़े होते हैं।
सात मुखी रुद्राक्ष का क्या महत्व है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सात मुखी रुद्राक्ष का संबंध मां महालक्ष्मी और शनि ग्रह से माना जाता है। सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से आर्थिक समस्याएं कम होने लगती है, आत्मविश्वास बढ़ने लगता है और जीवन में स्थिरता आती है। सात मुखी रुद्राक्ष की उपलब्धता मुश्किल होती है, कई लोग इसे करियर, व्यापार और मानसिक संतुलन के लिए भी शुभ मानते हैं। हालांकि, इन दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें आस्था से जोड़कर देखा जाता है।
रुद्राक्ष पहनते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आप भी रुद्राक्ष की माला को धारण करना चाहते हैं, तो ध्यान रखे कि वो हमेशा असली और प्राकृतिक हो। इसे धारण करने से पहले भगवान शिव की पूजा और मंत्र जाप करना चाहिए। कई श्रद्धालु सोमवार या सावन में रुद्राक्ष धारण करते हैं। रुद्राक्ष पहनने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।
सेहत के लिए रुद्राक्ष के फायदे
तनाव और चिंता को कम करता है
रुद्राक्ष के दाने तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन्हें पहनने से मस्तिष्क तरंगों में संतुलन बढ़ता है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद कम होता है। कई लोगों को ध्यान के दौरान रुद्राक्ष का उपयोग करने से अनिद्रा और मानसिक थकान से राहत मिलती है।
हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है
5 व 6 मुखी रुद्राक्ष ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और हृदय की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। ये हृदय गति और रक्त संचार को स्थिर रखने में मदद करते हैं, जिससे उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कम होता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा बढ़ाता है
रुद्राक्ष के दानों से शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता बढ़ती है। ये ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते हैं, थकान को कम करते हैं और शरीर की ऊर्जा नाड़ी को संतुलित करके रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं।
पाचन और चयापचय में सहायक
कुछ रुद्राक्ष पाचन और चयापचय में सुधार से जुड़े होते हैं। ये शरीर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त करने और आंतों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं।
एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है
विद्यार्थी और पेशेवर लोग अक्सर एकाग्रता और स्मृति बढ़ाने के लिए रुद्राक्ष का उपयोग करते हैं। विशेष रूप से चार मुखी रुद्राक्ष बेहतर और रचनात्मकता से जुड़ा हुआ है।
