नई दिल्ली:- आपने भी नोटिस किया होगा कि कुछ लोग जरूरत से ज्यादा बोलते हैं। कई बार तो उनकी ये आदत एरिटेटिंग भी हो जाती है। ऐसे लोगों को लगता है कि ज्यादा बोलने से हर कोई उनसे इंप्रेस होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही आदत उनकी वैल्यू भी कम कर देती है? बेस्ट सेलिंग बुक ‘The 48 Laws of Power’ के लेखक रॉबर्ट ग्रीन ने राज शमानी के पॉडकास्ट (Figuring Out with Raj Shamani) में बताया कि जब आप जरूरत से ज्यादा बोलते हैं, तो अनजाने में खुद को कमजोर, असुरक्षित और बेबस साबित कर रहे होते हैं। इससे आपकी इमेज भी खराब होती है। जानिए कैसे ज्यादा बोलना आपकी पर्सनालिटी के लिए खतरनाक हो सकती है..
रॉबर्ट ग्रीन का कहना है कि जो लोग हर समय अपनी सोच, इमोशंस और फीलिंग्स का बखान करते रहते हैं, वे दूसरों की नजरों में हल्के साबित होते हैं। अगर आप लगातार बोलते रहेंगे, तो देर-सवेर मुंह से कोई ऐसी बेवकूफी भरी बात निकल ही जाएगी, जिसका पछतावा बाद में होगा। शांत रहना और कम शब्दों में बात रखना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि दूसरों के सामने अपना दबदबा और ताकत बनाए रखने की सबसे बड़ी चाबी है।
आजकल ज्यादातर लोग दूसरों को खुश करने और अच्छा बनने की होड़ में लगे रहते हैं। इसे साइकोलॉजी में ‘पीपल प्लीजिंग’ कहा जाता है। जब आप सामने वाले की हर बात पर सहमति जताते हैं और अपनी बात साबित करने के लिए जरूरत से ज्यादा सफाई देते हैं, तो सामने वाला आपको आसानी से टेकन फॉर ग्रांटेड ले लेता है। सबको राजी रखने का ये डर आपको कमजोर दिखाता है। अपनी अलग राय रखना और चुप रहकर असहमत होना भी एक आर्ट है।
ग्रीन ने अपनी जिंदगी में कॉर्पोरेट और सोशल लाइफ को बहुत करीब से देखा है। उनका कहना है कि किसी भी मीटिंग या बातचीत में सबसे ज्यादा बोलने वाला इंसान ही सबसे ज्यादा ताकतवर हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार असली इम्प्रेशन उस इंसान का होता है, जो शांत बैठकर सबकी बातें ध्यान से सुनता है। जब ऐसा इंसान पूरी मीटिंग में सिर्फ एक या दो सही बातें कहता है, तो हर कोई उसकी बात ध्यान से सुनता है। कम बोलने और सही समय पर सही बात कहने का असर फालतू की बातों से कहीं ज्यादा होता है।
