मध्यप्रदेश:- ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर की समृद्ध पूजन परंपरा में आने वाले तीन महीने बेहद खास रहने वाले हैं। अश्विन से मार्गशीर्ष तक भगवान महाकाल छह बार चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे। विजयादशमी पर बाबा महाकाल दशहरा मैदान पहुंचकर शमी वृक्ष का पूजन करेंगे, जबकि वैकुंठ चतुर्दशी पर गोपाल मंदिर में भगवान विष्णु के साथ हरि-हर मिलन की परंपरा निभाई जाएगी।
20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर भगवान महाकाल अवंतिकानाथ राजा के रूप में नगर भ्रमण करते हुए दशहरा मैदान पहुंचेंगे। यहां शमी वृक्ष का पूजन किया जाएगा। शमी को भारतीय परंपरा में विजय, शक्ति और मंगल का प्रतीक माना जाता है। उज्जैन के अधिपति और राजा के रूप में भगवान महाकाल द्वारा किया जाने वाला यह पूजन राजसी परंपरा और लोकमंगल की भावना से जुड़ा है।
वैकुंठ चतुर्दशी पर गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन
23 नवंबर की रात भगवान महाकाल की सवारी गोपाल मंदिर पहुंचेगी। यहां रात 12 बजे हरि-हर मिलन की परंपरा निभाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवप्रबोधिनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने पर वैकुंठ चतुर्दशी के दिन भगवान महाकाल श्रीहरि विष्णु से मिलने पहुंचते हैं। गोपाल मंदिर में होने वाला यह आयोजन शिव और विष्णु की एकात्मता का प्रतीक माना जाता है।
शिप्रा तट पर होगा तीर्थपूजन
उज्जैन शहर में कार्तिक और मार्गशीर्ष यानी अगहन मास की सवारियां भी विशेष महत्व रखती हैं। इन अवसरों पर भगवान महाकाल शिप्रा तट पहुंचकर तीर्थपूजन की परंपरा निभाएंगे। सनातन परंपरा में कार्तिक-अगहन को स्नान, दान और तीर्थपूजन के लिए विशेष माना गया है। मान्यता है कि उज्जैन के राजा भगवान महाकाल स्वयं अपनी प्रजा के साथ तीर्थ पूजन करते हैं।
कार्तिक-अगहन की प्रमुख सवारियां:
16 नवंबर 2026 – कार्तिक मास की पहली सवारी
23 नवंबर 2026 – कार्तिक मास की दूसरी सवारी
23 नवंबर रात – वैकुंठ चतुर्दशी पर हरि-हर मिलन
30 नवंबर 2026 – अगहन मास की पहली सवारी
7 दिसंबर 2026 – अगहन मास की दूसरी सवारी
इसके अलावा 12 अक्टूबर को अश्विन शुक्ल द्वितीया पर उमा माता की सवारी निकलेगी। चांदी की पालकी में उमा माता रामघाट पहुंचेंगी, जहां उमा सांझी उत्सव के समापन पर सांझी का शिप्रा में विसर्जन होगा। इस सवारी में भगवान महाकाल नंदी पर मनमहेश स्वरूप में नगर भ्रमण करेंगे।
