मध्य प्रदेश :- युवा मतदाताओं को लेकर सरकार और राजनीतिक दलों का फोकस बढ़ता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार, 6 अक्टूबर को भोपाल में सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 20 हजार से अधिक युवाओं से संवाद किया।
कार्यक्रम में रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता और नई तकनीकों से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई।
2028 से पहले युवाओं पर क्यों बढ़ा फोकस?
मध्य प्रदेश में 18 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 1.41 करोड़ युवा बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह आयु वर्ग आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ग की मतदाता हिस्सेदारी करीब 26 प्रतिशत बताई जा रही है। 2028 के विधानसभा चुनाव तक बड़ी संख्या में युवा मतदाता पहली बार या शुरुआती चुनावी अनुभव के साथ मतदान करेंगे। ऐसे में रोजगार, शिक्षा, कौशल और उद्यमिता जैसे मुद्दे इस वर्ग के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
रोजगार से लेकर स्टार्टअप तक पर जोर
सीएम यूथ कॉन्क्लेव का फोकस सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रखा गया। युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के विकल्पों से जोड़ने के साथ नई तकनीकों में करियर की संभावनाओं की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में 17 सरकारी विभाग और विभिन्न संस्थाएं शामिल हुईं। 80 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए, जहां युवाओं को रोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप से संबंधित जानकारी दी गई। AI, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी तकनीकों पर भी विशेष फोकस रहा।
देश में 36.74 करोड़ युवा, 2029 में बड़ी भूमिका
राष्ट्रीय स्तर पर भी युवा आबादी चुनावी दृष्टि से बड़ा वर्ग है। दिए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2026 में देश में 15 से 29 वर्ष की आयु के करीब 36.74 करोड़ युवा हैं, जो कुल आबादी का लगभग 26 प्रतिशत हैं। यही आयु वर्ग 2029 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक महत्वपूर्ण मतदाता समूह होगा। हालांकि, युवा आबादी और युवा मतदाताओं के आंकड़ों में आयु-सीमा अलग होने के कारण दोनों को एक ही श्रेणी नहीं माना जा सकता।
2024 में 18-29 आयु वर्ग के 22.78% मतदाता
भारत निर्वाचन आयोग के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक देश में 18 से 29 वर्ष के मतदाताओं की हिस्सेदारी 22.78 प्रतिशत थी। मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 27.18 प्रतिशत दर्ज किया गया था। यानी राज्य में युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। ऐसे में 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले युवाओं को रोजगार, शिक्षा, कौशल और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की कोशिशें राजनीतिक और नीतिगत दोनों स्तरों पर अहम रहेंगी।
