नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के वैश्विक योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने दुनिया को सस्ती दवाएं और प्रतिभाशाली मानव संसाधन उपलब्ध कराया है। भारत ने अपने योगदान के बदले न तो क्रेडिट की मांग की और न ही रॉयल्टी लेने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने भारत की इसी भूमिका को वैश्विक सहयोग और विकास की भावना से जोड़कर पेश किया।
भारत पहली बार ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की मेजबानी कर रहा है। यह मंच वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, निवेश और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा के लिए दुनिया भर के नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और विशेषज्ञों को एक साथ लाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकास यात्रा का उद्देश्य केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी अवसर पैदा करना है। उन्होंने तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार को 21वीं सदी की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल लोगों को सशक्त बनाने के लिए कैसे किया जा रहा है।
डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप पर भी जोर
प्रधानमंत्री ने भारत के डिजिटल इकोसिस्टम और स्टार्टअप क्षेत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में स्टार्टअप की संख्या बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए, ताकि छोटे शहरों और कस्बों के लोगों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का आठवां संस्करण 13 से 15 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इसमें दुनिया भर से 500 से अधिक सरकारी और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, निवेश, ऊर्जा और बदलते भू-राजनीतिक हालात जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
