कोरबा:-श्रीराम-लक्ष्मण के समक्ष शूर्पणखा का विवाह प्रस्ताव, अपमान की आग में प्रतिशोध का संकल्प
नगर निगम द्वारा आयोजित छह दिवसीय रामलीला में शूर्पणखा प्रसंग के मंचन ने रामायण की कथा को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया। श्रीराम और लक्ष्मण के समक्ष शूर्पणखा के विवाह प्रस्ताव, उसके अस्वीकार और अपमान से उपजे प्रतिशोध ने आगे चलकर रावण के विनाश की भूमिका तैयार की।
प्रसंग में शूर्पणखा श्रीराम के प्रति आकर्षित होकर उनसे विवाह की इच्छा प्रकट करती है। श्रीराम उसे लक्ष्मण के पास भेजते हैं और लक्ष्मण भी उसके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते। बार-बार अस्वीकार किए जाने से क्रोधित शूर्पणखा सीता पर आक्रमण करने का प्रयास करती है। तब लक्ष्मण उसका प्रतिकार करते हैं और शूर्पणखा अपमानित होकर प्रतिशोध की आग में जल उठती है।
अपने अपमान को राक्षसराज रावण के सामने रखते हुए शूर्पणखा उसे श्रीराम से बदला लेने के लिए उकसाती है। यही प्रसंग आगे चलकर सीता हरण और राम-रावण युद्ध की घटनाओं की पृष्ठभूमि बनता है।
रामलीला का यह प्रसंग बताता है कि अनियंत्रित वासना, क्रोध, प्रतिशोध और अहंकार किस तरह विनाश का मार्ग प्रशस्त करते हैं। शूर्पणखा के अपमान से शुरू हुआ घटनाक्रम अंततः रावण के पतन तक पहुंचता है। कथा यह भी सिखाती है कि किसी भी परिस्थिति में विवेक, मर्यादा और संयम का त्याग नहीं करना चाहिए।
नगर निगम की रामलीला में रामायण के इन प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को धर्म, मर्यादा और कर्मों के परिणामों का संदेश दिया जा रहा है।
