नई दिल्ली:- आपने 1, 2, 5, 10 और 20 रुपये के सिक्के तो देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी 200 रुपये का सिक्का देखा है? इसकी बनावट कैसी होती है, इसमें कौन-सी धातु इस्तेमाल होती है और आखिर इसे जारी क्यों किया गया है? रायपुर में जारी हुआ यह खास स्मारक सिक्का ऐसी कई दिलचस्प बातें समेटे हुए है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में पूज्य माता साहिब हासी देवी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश माता हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे।
आधा हिस्सा चांदी का, चार धातुओं से बना है सिक्का
इस सिक्के की सबसे दिलचस्प बात इसकी धातु संरचना है। इसे केवल एक धातु से तैयार नहीं किया गया है। इसमें 50 प्रतिशत चांदी, 40 प्रतिशत तांबा, पांच प्रतिशत निकल और पांच प्रतिशत जस्ता शामिल है। यानी इसमें इस्तेमाल धातुओं के मिश्रण का आधा हिस्सा चांदी का है।
सिक्के का मानक वजन 35 ग्राम निर्धारित है। इस अनुपात के हिसाब से इसमें लगभग 17.5 ग्राम चांदी होती है। इसका व्यास 44 मिलीमीटर है और किनारे पर 200 दांतियां निर्धारित की गई हैं।
एक तरफ राष्ट्रीय चिह्न, दूसरी ओर माता हासी देवी की छवि
सिक्के के एक हिस्से पर अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष अंकित है। इसके नीचे ‘सत्यमेव जयते’, रुपये का प्रतीक और 200 का मूल्यवर्ग दिया गया है। इसी ओर हिंदी में ‘भारत’ और अंग्रेजी में ‘INDIA’ लिखा है।
दूसरे हिस्से पर माता साहिब हासी देवी की तस्वीर अंकित है। उनके नाम के साथ हिंदी और अंग्रेजी में 200वीं जयंती का उल्लेख किया गया है। तस्वीर के दोनों ओर 1826 और 2026 वर्ष लिखे हैं, जो उनकी जन्म द्विशताब्दी को दर्शाते हैं। नीचे शदाणी दरबार तीर्थ, रायपुर की पंचम पीठाधीश होने का परिचय भी दिया गया है।
कौन थीं माता हासी देवी, जिनकी याद में जारी हुआ सिक्का?
माता साहिब हासी देवी का जन्म वर्ष 1826 में अविभाजित भारत के सिंध क्षेत्र स्थित खानपुर महार में हुआ था। करीब 26 वर्ष की उम्र में उन्होंने शदाणी दरबार की गुरु गद्दी संभाली और लगभग 57 वर्षों तक आध्यात्मिक दायित्व निभाया।
उन्हें भक्ति, शिक्षा और जरूरतमंदों की सेवा के लिए याद किया जाता है। उन्होंने हिंदी, संस्कृत और संगीत की शिक्षा को प्रोत्साहित किया। गरीबों, अनाथों, विधवाओं और निराश्रितों की सहायता उनके सेवाकार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
सिक्का संग्रह करने वालों के लिए भी खास अवसर
यह स्मारक सिक्का माता हासी देवी के जीवन और आध्यात्मिक योगदान की स्मृति को संजोने के उद्देश्य से जारी किया गया है। श्रद्धालुओं के साथ सिक्का संग्रह में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी इसका विशेष महत्व है। इसकी बुकिंग के संबंध में शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों से जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
