
सम्पूर्ण ब्रह्मांड को ज्ञान झलक दिखलाने वाले इस रामायण के चित्रण वर्णन को गहराई से चिंतन मनन कर ज्योतिष में डुबकियां लगाई जाए तो हमे इसका अहसास होता है कि वास्तव में रामायण को अब तक हम पढ़ रहे थे यह ज्योतिष का सबसे महत्वपूर्ण वास्तविक रूप है रामायण एक ऐसा ग्रंथ जिसको देखने , सुनने और पढ़ने मात्र से सभी 9 ग्रहो , 27 नक्षत्रों और अनगिनत तारों का एक अद्भुत चित्रण रामायण में ही हमे देखने को मिलता है ।
राहु (रावण) – जिस ग्रह पर हमने अभी तक सबसे ज्यादा फोकस किया राहु , आखिर यह राहु है कौंन राहु में ऐसा क्या है जो कुछ भी कर देने की ताकत रखता है , हमने पढ़ा राहु मायावी है , ताकतवर है भोतिक वादी है ,धनाधिपति है ,बादशाह है , राहु की अद्वितीय शक्तियों का कोई बखान नही किया जा सकता है , हमने यह भी वर्णित पाया है राहु सभी ग्रहो को फल दे सकता है राहु कुछ भी कर सकता है यह राहु अंततः काल है यह राहु मुख्यतः प्रारब्ध ही तो है ,
यह राहु कुछ भी है भोतिक वादी है ना और भोतिक जीवन जीना सिर्फ भृम ही तो है राहु के पास वह अनन्त शक्तियां है जिसकी शक्ति का डंका अखण्ड ब्रह्माण्ड विख्यात है यह राहु और कोई दूसरा नही है राहु जिसको हम जन्मकुंडली में देख रहे है वह रावण है , जी बिल्कुल सही पड़ रहे है आप रावण कोई दूसरा व्यक्ति नही है रावण एक महाप्रतापी राजा , एक सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषाचार्य , एक प्रखर बुद्धि वाला , सोने कि लंका एक ऐसा वैभव जो ब्राह्मण में किसी दूसरी जगह मौजूद नही था और एक चतुर मायावी राजनीतिक व्यक्ति , छल कपट को जानने वाला ,अपनाने वाला बहुत ही गुणवान व्यक्ति जो भगवान शिव का प्रिय था जो
शिव तांडव का रचयिता है
जो साक्षात काल का रूप है जो राहु का रूप है वह रावण है , यही वही राहु है जो शिव का सबसे प्रिय ग्रह है यही रावण था जो शिव का सबसे प्रिय भक्त था बिल्कुल राहु ही रावण है , रावण और राहु में कोई भेद नही है रावण के जितने गुण थे वही सभी गुण राहु में है मूल रूप से रावण कोई साधारण प्राणी नही था वह राहु का एक अवतारी पुरुष मात्र था , रावण एक मायावी दैत्य था रावण एक ब्राह्मण कुल का था (ब्राह्मण वही है जो ऊंची सोच और ऊंचे विचार का जनक हो) रावण बेशक उस युग का महापुरुष और राजा कहलाता था
जो ज्ञान , गुण , बुद्धि , सिद्धि और अनुभव में एक उच्च कोटि का विद्वान था उस विश्व और अखण्ड ब्रह्मांड में ( त्रिदेव को छोड़ दिया जाए तो )रावण से बली कोई दूसरा नही था यह रावण है और यही राहु का एक जीवंत उदाहरण है जिसे हम रामायण में रावण के नाम से जानते है वह ज्योतिषफल में राहु कहलाता है , अगर किसी को राहु को समझने में कठिनाई आती है तो सिर्फ रावण को समझ ले रावण ही राहु के रूप में हर चित्रण में समाहित है रावण ही राहु का रूप हैं । रावण का एक नाम दशानन था इसका अर्थ है जिसके पास 10 मस्तक हो वास्तव में राहु मस्तक ही तो है यह दिमाग हेड राहु ही तो है यह रावण है रावण और कोई भी नही सिर्फ राहू का अवतार हैं ।
उघरें अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥
रामयणा की यह चौपाई भी यही बताती कि राहु ही रावण हैं।