रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने जिन बातों को लेकर पंचायत विभाग से इस्तीफा दिया है उसपर अब मनरेगा कर्मचारियों ने सवाल उठाया है। साथ ही अपने पत्र में मनरेगा कर्मचारियों के हड़ताल को लेकर जो विचार व्यक्त किए है उसपर नाराजगी भी जाहिर की है। इसको लेकर मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को 9 बिंदुओं पर दो पन्नों का पत्र लिखा है।
मनरेगा कर्मचारी महासंघ के द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि, आपने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव हम मनरेगा कर्मचारियों के हड़ताल को लेकर जो विचार व्यक्त किए है, उससे हम सभी आहत हुए हैं।
(1) साजिश के तहत रोजगार सहायकों से हड़ताल कराना एवं कार्य प्रभावित करना- आपके आरोप से हम 12731 मनरेगा कर्मचारी बहुत आहत हुए हैं। हमने 16 साल पूर्ण समर्पण भाव से कार्य किया है। कोरोनाकाल में हमारे 200 से अधिक साथियों ने अपनी शहादत देकर ग्रामीण मनरेगा मजदूरों को काम उपलब्ध कराया है। हम कर्मचारियों की विगत 06 माह से वेतन नहीं मिला था, आपके घोषणा को आत्मसात करने जब हमने रैली, आवेदन के माध्यम से निवेदन किया फिर भी हमारी पीड़ा को समझने वाला कोई नहीं था। इन सब कारणों से समस्त मनरेगा कर्मचारी एक मत से हड़ताल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
(2) हड़ताल में सहायक परियोजना अधिकारी (संविदा) की भूमिका- हड़ताल में समस्त मनरेगा कर्मचारी वर्ग जिसमें सहायक परियोजना अधिकारी, प्रोग्रामर, सहायक प्रचार प्रसार अधिकारी, शिकायत समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारीए सहायक प्रोग्रामर, तकनीकी सहायक, लेखापाल, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सहायक ग्रेड 03, रोजगार सहायक और भूत्य सभी ने मिलकर एक स्वर में किया क्योकि हम कर्मचारियों को विगत 06 माह से वेतन नहीं मिला था, साथ ही कई बार आवेदन के बाद भी विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की गई।
(3) कमेटी गठन के बाद भी हड़ताल वापिस न होना- पूर्व में भी कर्मचारियों के मांग के सम्बंध में कमेटियों का गठन हुआ था, किसी भी कमेटी का निर्णय अभी तक नहीं आया था, इसके कारण समस्त मनरेगा कर्मचारियों द्वारा हडताल जारी रखा गया था।
(4) हडताल में 1250 करोड़ रूपए का नुकसान- पूर्व वित्तीय वर्ष 2021-22 के समस्त लंबित कार्यों को पूरा करके ही हड़ताल में गए एवं हड़ताली दिनों में भी मनरेगा कर्मचारी द्वारा यही कहा गया कि जो भी वित्तीय वर्ष 2022-23 का लक्ष्य है, उसको 31 मार्च 2023 तक पूरा करा दिया जाएगा। लोकतांत्रिक तरीके से हड़ताल के जरिए ही अपनी जायज मांग रखे है कर्मचारी, हमारे पास कोई दूसरा विकल्प बचा ही नहीं था।
( 5 ) नवीन रेगुलर एपीओ की भर्ती, पूर्व में कार्यरत एपीओ (संविदा) के स्थान पर- हड़ताल में पूरे 12731 कर्मचारी शामिल थे, किंतु केवल 21 एपीओ को टारगेट बनाकर सेवा से पृथक किया जाना और ऊपर से उनके स्थान पर रेगुलर एपीओ की पदस्थापना कर्मचारियों के प्रति एक अत्यंत ही असंवेदनशील सोच को दर्शाता है।
(6) एपीओ द्वारा कार्य प्रभावित करना जबकि रोजगार सहायक कार्य में आना चाह रहे थे- हड़ताल में समस्त मनरेगा कर्मचारी वर्ग शामिल रहे है, रोजगार सहायक का वेतन विगत 16 वर्षों के उपरांत मात्र 5000 रुपए ही था। साथ ही उच्च अधिकारियों द्वारा बिना किसी सुनवाई के नौकरी से निकाले जाने का भय बना रहता था, आपके घोषणा उपरांत 10000 रोजगार सहायकों में एक उम्मीद की किरण जगी थी, जिसके लिए सभी हड़ताल में शामिल थे।
( 7 ) एपीओ (संविदा) की पूर्व पद पर बहाली न करना- समस्त मनरेगा कर्मचारियों में से किसी एक वर्ग केवल एपीओ की बहाली ना करने का अनुरोध केवल और केवल एपीओ के बारे में मिथ्या वातावरण बनाकर उनकी सेवा समाप्ति करना अनुचित प्रतीत होता है। इसके विपरीत सरकार द्वारा बहाली करने का निर्णय कर्मचारियों के प्रति एक संवेदनशीलता का परिचय है।
( 8 ) एपीओ कर्मीयों के प्रति भावना, जनहित एवं राजहित के विपरीत कार्य करना एवं उनकी नियुक्ति अनुचित है – मनरेगा कर्मचारियों द्वारा विगत वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर राज्य को कई अवार्ड दिलाए हैं, यहां तक द्य कि अपनी शहादत देकर कोरोना काल में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को रोजगार दिलाने में देश में उत्कृष्ट कार्य किए। कर्मचारी जब अपनी मांगों को लेकर दांडी यात्रा पर निकले तो गांव व नगरों में कर्मचारियों को आमजनता का समर्थन प्राप्त होने के अलावा पंचायत जनप्रतिनिधियों के साथ ही साथ कांग्रेस के माननीय विधायकों एवं पदाधिकारियों का पत्र के माध्यम से समर्थन प्राप्त हुआ है।
( 9 ) पुनः नियुक्ति करना अनुचित है- ऐसे शब्द कर्मचारियों के लिए पीड़ादायक है क्योंकि पूर्व में भी अन्य कर्मचारी संगठनों द्वारा हड़ताल किया गया जिसमें हड़ताली समय में सेवा समाप्त किए गए कर्मचारियों का पुनः बहाली आप ही के द्वारा किया गया था इसलिए केवल मनरेगा कर्मचारी में एपीओ का पुनः बहाली अनुचित कहना 12731 मनरेगाकर्मीयों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।
उपरोक्त 9 बिन्दुओं में मनरेगा संगठन अपने कथन को स्पष्ट करते है। हम बताना चाहते है कि कई वर्षों से हमने कड़ी मेहनत कर छत्तीसगढ़ को 31 राष्ट्रीय अवार्ड दिलाये, कोरोना वैश्विक महामारी काल में कर्मचारियों ने अपनी जीवन की परवाह करते हुए राज्यहित श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराये, जिससे राज्य श्रमिक पलायन नहीं छत्तीसगढ़ राज्य को रोजगार उपलब्ध कराने में किये। किन्तु 200 से अधिक मनरेगाकर्मीयों के शहादत को नजरअंदाज करते देश में अव्वल दर्जा स्थापित हुए हमारे आंदोलन को साजिश करार दिया गया।
जिससे 12731 मनरेगाकर्मी कर्मचारी अत्यंत व्यस्थित एवं दुखी है। लगातार हमारी मांगों की अनदेखी करना, नियमित रूप से कई माहो से वेतन मिलना एवं इस संबंध में कोई सकारात्मक पहल न करना हमारे आंदोलन का मुख्य कारण है। मनरेगाकर्मी छत्तीसगढ़ के गांव, गरीब तपके से आते है, इनकी मांगों को लम्बे से अनदेखा करने से हमारे जीवकोपार्जन में कठिनाईयों उत्पन्न हुई। जिससे मनरेगाकर्मीयों ने विवश होकर लोकतात्रित तरीके से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन की ओर अग्रसर हुए।