रायपुर: आज पुरे विश्व आदिवासी दिवस का पर्व मनाया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक अलग पहचान है. छत्तीसगढ़ के वन और यहां सदियों से निवासरत आदिवासी राज्य की पहचान रहे हैं. प्रदेश के लगभग आधे भू-भाग में जंगल है, जहां छत्तीसगढ़ की गौरवशाली आदिम संस्कृति फूलती-फलती रही है. तकरीबन साढ़े तीन साल पहले नवा छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लेते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों को उनके सभी अधिकार पहुंचाने की पहल शुरू की, जिससे आज वनों के साथ आदिवासियों का रिश्ता एक बार फिर से मजबूत हुआ है और उनके जीवन में नई सुबह आई है.
छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड़ महासभा के प्रदेशाध्यक्ष आइएएस नीलकंठ टेकाम ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में सम्मेलन के विषय में बताते हुए कहा कि पूरे विश्व में आदिवासी जनजाति समाज रहता है। प्रदेश के सभी संभाग में आदिवासी निवास करते हैं। इस सम्मलेन में आदिवासी समुदाय के लोगों के जीवन स्तर पर कितना बदलाव आया है, इस पर समीक्षा की जाएगी। साथ ही समाज के उत्थान के लिए रणनीति तैयार करेंगे, ताकि समाज के लोगों का जीवन स्तर में सुधार हो सके।मंगलवार को साइंस कालेज में आयोजित विश्व आदिवासी सम्मलेन को मुख्य वक्ता के रूप में केन्या स्थित वामुला इंटरनेशनल के सीईओ डा. राबर्ट वाफुला संबोधित करेंगे।
मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री सीएम भूपेश बघेल होंगे।छत्तीसगढ़ में हुआ आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजनअंतर्राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का भव्य आयोजन इसी प्रयास की एक कड़ी है. प्रदेश सरकार द्वारा आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर में संग्रहालय की स्थापना वास्तव में आदिवासियों की समृद्ध कला एवं संस्कृति और उनके जीवन से सदियों से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयत्न है.
शहीद वीरनारायण सिंह की स्मृती में हुए कई निर्माणप्रदेश के प्रथम शहीद वीरनारायण सिंह की स्मृति में लगभग 25 करोड़ 66 लाख रूपए की लागत से 10 एकड़ भूमि में स्मारक-सह-संग्राहलय का निर्माण नवा रायपुर अटल नगर में पुरखौती मुक्तांगन में किया जा रहा है. इसमें प्रदेश के जनजातीय वर्ग के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का जीवंत परिचय प्रदेश और देश के शोध छात्र और आम जनों को हो सकेगा.
वन अधिकार पट्टाधारी वनवासियों के जीवन को आसान बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उनके पट्टे की भूमि का समतलीकरण, मेड़बंधान, सिंचाई की सुविधा के साथ-साथ खाद-बीज एवं कृषि उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं. वन भूमि पर खेती करने वाले वनवासियों को आम किसानों की तरह शासन की योजनाओं का लाभ मिलने लगा है.